11 जुलाई को सोनौली बॉर्डर के पास गिरफ्तार किया गया था जार्डन ब्राउन
लोकल इंटेलिजेंस के इनपुट पर राज्य व केंद्रीय एजेंसियों की बढ़ी सक्रियता
जार्डन की ट्रैवल हिस्ट्री से संदिग्ध लग रहा उसका भारत आने का उद्देश्य
महराजगंज। बिना वैध दस्तावेजों के नेपाल जाने के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाॅर्डर सोनौली से गिरफ्तार अमेरिकी नागरिक जार्डन (36) की ट्रैवल हिस्ट्री खंगालने में पुलिस व खुफिया एजेंसियां जुटी हैं। अभी तक की जांच में देश के 31 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों की एफटीआई (फास्ट टैग इमीग्रेशन) रिकॉर्ड्स से जार्डन के भारत आने की पुष्टि नहीं हो सकी है। इस तथ्य के सामने आने के बाद जल मार्ग से उसके दाखिल होने का संदेह गहरा गया है।
11 जुलाई को अमेरिकी नागरिक जार्डन ब्राउन को उस वक्त दबोच लिया गया जब वह पिलर रूट (पगडंडी मार्ग) से भारत से नेपाल जाने की कोशिश कर रहा था। एसएसबी 22वीं वाहिनी के जवानों ने जब उसे पकड़ा तो उसके पास वीजा व पासपोर्ट नहीं मिले। पूछताछ के बाद उसके खिलाफ सोनौली थाने में तहरीर देकर आव्रजन व विदेशी अधिनियम 2025 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
गिरफ्तारी के बाद जेल भेजे जाने के पहले जार्डन से पुलिस व लोकल इंटेलिजेंस ही नहीं राज्य व केंद्र स्तर की एजेंसियों ने कई चरणों में पूछताछ की। जार्डन बार-बार बयान बदलता रहा। उसने सभी एजेंसियों को अलग-अलग जानकारी दी। उसने दो एजेेंसियों को बताया कि वह अमेरिकी सेना के नेवी सील्स का कांट्रेक्ट कमांडो है। हालांकि उसके पुष्ट शरीर और बिना सोए लगातार जवाब देने की उसकी क्षमता देखकर एजेंसियां यह पहले ही भांप गईं थीं।
ट्रैवल हिस्ट्री में जलमार्ग से आने के संकेत
जार्डन से घंटों की पूछताछ कर गोपनीय तरीके से लौट चुकी एजेंसियां पूछताछ से मिली जानकारी और लोकल इंटेलिजेंस के इनपुट पर उसकी ट्रैवल हिस्ट्री खंगाल चुकी हैं। स्थानीय सुरक्षा एजेंसी के एक अधिकारी के अनुसार, देश के 31 हवाई अड्डों के एफटीआई (फास्ट टैग इमीग्रेशन) रिकार्ड्स की जांच में जार्डन के आने की पुष्टि नहीं हुई है। अब जल मार्ग से उसके भारत में आने के शक का गहरा हो गया है। अभी तक की जांच में यह साफ हो रहा है कि वह जल मार्ग से कोलंबो से गोवा आया है। आशंका है कि जल मार्ग से भी उसने वैध तरीके से नहीं बल्कि प्रेशर या पैडल नाव के माध्यम से यात्रा किया है। यह नाव कोलंबो और गोवा दोनों ही जगह उपलब्ध रहते हैं।
भारतीय मिशन व नेपाल जाने के उद्देश्य तक पहुंचना बाकी
जार्डन की गिरफ्तारी को छह दिन बीत चुके हैं। शनिवार की गिरफ्तारी के चलते रविवार अवकाश का लाभ पुलिस व एजेंसियों को मिला जिससे पूछताछ को पर्याप्त वक्त न सिर्फ पुलिस व लोकल इंटेलिजेंस को पूछताछ के लिए मिला बल्कि बाहरी एजेंसियों ने भी गुप्त पूछताछ पूरी की। इसी आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। मामले में खास तथ्य यह है कि गिरफ्तारी व पड़ताल तो पुलिस की दिखाई जा रही लेकिन सच्चाई यह है कि पुलिस व लोकल इंटेलिजेंस के इनपुट पर जांच का जिम्मा राज्य व राष्ट्रीय स्तर की एजेंसी कर रही हैं।
सुरक्षित बचने के लिए करते सोनौली सीमा का उपयोग
दीवानी न्यायालय महराजगंज में आव्रजन व विदेशी अधिनियम के जानकर अधिवक्ता हमीदुल्लाह खान ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा सोनौली पहचान छिपाकर आने जाने वालों को इसलिए अधिक मुफीद लगती है। कारण कि यह दोनों देशों के बीच का सबसे प्रमुख बाॅर्डर है। यहां से पगडंडी मार्ग का सहारा लेकर सिर्फ छोर बदल लें तो किसी भी तरफ की मुख्य सड़क से आगे की यात्रा आराम से कर सकते हैं।
वर्जन
जार्डन को न्यायालय के आदेश पर 14 दिन के लिए जिला कारागार भेज दिया गया है। पूछताछ में संदिग्ध प्रतीत होने व मिली अन्य संभावित बिंदू पर जांच की जा रही है। इसमें ट्रैवल हिस्ट्री भी एक महत्वपूर्ण बिंदु है।
- बसंत सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी, नौतनवा