लक्ष्मीपुर से टेढ़ीघाट तक 100 साल बाद फिर से दौड़ेगी ट्राम-वे रेल
लक्ष्मीपुर (महराजगंज)। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने ट्राम-वे रेल परियोजना का निरीक्षण मंगलवार को किया। उनके साथ गुजरात इंजीनियरों की टीम मौजूद रही। निरीक्षण के बाद डीएम ने अधिकारियों से ट्राम-वे रेल को 12 किमी टेढ़ीघाट वन विश्रामालय तक चलाने की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इसको 100 वर्ष बाद फिर चलाने का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित करने के साथ पर्यटन को बढ़ाया देना है।
लक्ष्मीपुर में वर्ष 1922 में शुरू हुई थी ट्राम-वे रेल। जिलाधिकारी ने एकमा डिपो में रखे ऐतिहासिक ट्राम-वे रेल इंजन को देखा। गुजरात से आए रेल इंजीनियर बिरेन से उसकी स्थिति पर चर्चा की। इंजीनियर ने बताया कि इंजन को चलाने के लिए कृत्रिम उपकरणों का उपयोग भी करना पड़ेगा।
जिलाधिकारी ने पुरानी रेल पटरियों को देखने के बाद मातहतों को निर्देश दिया कि ट्राम-वे रेल को दो किमी जंगल में चलाने के लिए जल्द से जल्द कार्ययोजना तैयार की जाएगी। रेल लाइन के नीचे लगे लकड़ी के स्लीपर को खुदवा कर देखा गया। जमीन में अब भी साखू के स्लीपर सही सलामत मिले। उन्होंने रेंजर विनोद तिवारी से कहा कि 12 किमी जंगल में रेल लाइन का वीडियो बना कर जिला मुख्यालय को अवगत कराएं। डीएम ने कहा कि यह ध्यान रहे कि इसके निर्माण का उद्देश्य ऐतिहासिक धरोहर को सुरक्षित करने के साथ पर्यटन को बढ़ाया देना है। गौतम बुद्ध के ननिहाल देवदह तक आने वाले विदेशी पर्यटकों को लुभाने के लिए सरकार यह तैयारी कर रही है।
जिलाधिकारी ने कहा कि सब कुछ ठीक रहा तो लक्ष्मीपुर से टेढ़ीघाट वन विश्रामालय तक 12 किमी फिर से ट्राम-वे रेल इंजन व बोगियां दौड़ेंगी। करीब एक घंटे निरीक्षण के बाद देर शाम जिलाधिकारी वापस लौटे। इस अवसर पर बीडीओ योगेंद्र राम त्रिपाठी, रेंजर विनोद तिवारी, ग्राम पंचायत गोल्डी सिंह, मनोज कुमार कन्नौजिया आदि उपस्थित रहे।