ग्राम सभा धनहा नायक में मृत महिला के घर पहुंची महिलाएं।
महराजगंज। पहले जरूरत पूरी करने के लिए कर्ज लिया... फिर कर्ज उतारने के लिए। यह चक्र ऐसा चला कि परिवार कर्ज के दलदल में फंस गया। इससे निकलने की सारी कोशिशें नाकाम रहीं तो श्यामदेउरवां थाना क्षेत्र के ग्राम सभा धनहा नायक निवासी सब्या ने अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली। जब उसने जंजाल से निकलने के लिए जीवन त्याग करने का फैसला किया तब उसके परिवार पर चार माइक्रो फाइनेंस कंपनियाें का करीब 1.95 लाख का कर्ज था।
वह तो दुनिया छोड़ गई पर अपने पीछे तीन बच्चों लक्ष्मी (12) व बेटा अंश (9) और विराट (7) को रोता-बिलखता छोड़ गई। नसीब भी ऐसा कि अंतिम समय में पति का कंधा भी नसीब नहीं हुआ, क्योंकि पति मुन्ना इस बेबसी से बाहर निकलने की कोशिश में दो महीने पहले ही विदेश कमाने चला गया था। यह कहानी सिर्फ सब्या की नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में 20-25 और भी महिलाएं हैं जो कर्ज के इस जंजाल में फंसी है और एजेंटों की धमकियों को सह रही हैं। कई तो डर से दिन में अपने घर में ही नहीं रहतीं।
सब्या की बहन संगम ने बताया कि वह कई दिनों से परेशान थी। किस्त की वसूली करने के लिए एजेंट घर पर रोज आते थे। रोज धमकाते थे, जिससे वह मानसिक रूप से परेशान रहती थी। वह यह परेशानी झेल नहीं पाई और जान दे दी। महिला की मौत के मामले में थाने में कोई तहरीर नहीं दी गई है। गांव में बातचीत करने पर पता चला कि कर्ज के तनाव से महिला नींद की गोली खाकर सोती थी। दिन में एजेंट आकर खरीखोटी सुनाते थे।
शनिवार को धनहा नायक गांव में सब्या के घर पर कुछ महिलाएं सांत्वना देने पहुंचीं थी। बातचीत में महिलाएं कहने लगी कि एजेंट पहले तो आसानी से कर्ज देकर अपना कमीशन लेकर किनारे हो जाते हैं। इसके बाद वसूली में सख्ती बरतने लगते हैं। गांव में करीब 20 से 25 महिलाओं ने माइक्रोफाइनेंस कंपनियों से कर्ज लिया है। इन सभी ने बताया कि करीब दो माह से एजेंट किस्त जमा करने के लिए अधिक दबाव बना रहे हैं। दिन में घर छोड़कर इधर-उधर रहना पड़ता है।
पास के गांव मोहद्दीनपुर बनकटिया में भी यही हाल है। बनकटिया की राबिया कहती हैं कि कर्ज लेने के दौरान कोई परेशानी नहीं होती है। किस्त जमा करने में बेवजह परेशान किया जाता है। धनावती ने बताया कि अगर किसी कंपनी से कर्ज लिया है तो भी दूसरी कंपनी वाले कर्ज आसानी से देते हैं। इससे हर कोई जरूरत पूरी करने के लिए कर्ज लेता है। बाद में यही कर्ज मुसीबत बन जाता है।
इसी गांव की रीता देवी कहने लगी कीं एजेंट कंपनी बदल-बदल कर काम करते हैं। उनको क्षेत्र के बारे में पूरी जानकारी होती है। ऐसे में कमीशन के चक्कर में पहले से कर्ज बोझ तले दबी महिलाओं को ज्यादा कर्ज देकर फंसा देते हैं। कलावती ने बताया कि एक बार पूछताछ की तो पता चला की 23 प्रतिशत तक ब्याज लगता है। ऐसे में अगर एक भी किस्त रुक जाती है तो ब्याज की रकम बढ़ती चली जाती है। अधिक दिन होने पर परेशानी होने लगती है।