ठूठीबारी। इंसानियत और मानवता से बढ़कर कोई धर्म नहीं है। वैशाख माह की पूर्णिमा के दिन ही भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। उन्होंने समूची मानव जाति को शांति, मैत्री और करुणा का पाठ पढ़ाया। दुनिया भर में फैल रही अशांति के मद्देनजर आज भी बुद्धम शरणम गच्छामि मंत्र को आत्मसात करने की जरूरत है।
यह विचार बुद्ध जयंती के अवसर पर भारत नेपाल सीमा पर अवस्थित बेलवा घाट परिसर में स्वरांजलि सेवा संस्थान के 142 वीं नारायणी गंडकी महा आरती कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि एचएल थारू ने व्यक्त किया। नारायणी गंडकी महाआरती कार्यक्रम के दौरान बुद्धम शरणम गच्छामि के उद्घोष से समूचा नारायणी घाट गूंज उठा।
अपने संबोधन में समाजसेवी संगीत आनंद ने कहा की भगवान विष्णु ने गौतम बुद्ध के रूप में धरती पर 9 वां अवतार लिया था। ऐसे में बुद्ध जयंती के अवसर पर महात्मा बुद्ध के बताए गए आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया जाना चाहिए। पंडित रामेश्वर तिवारी ने कथा पूजा एवं हवन के जरिए विश्व शांति की कामना की।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि निर्माता एचएल थारू, विशिष्ट अतिथि अरविंद कुमार अकेला, समाजसेवी संगीत आनंद ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इस दौरान अभिनेता डी आनंद, अरविंद अकेला, कुमारी संगीता, विजय कुमार गुप्ता, जयदेव कुमार मौजूद रहे। संवाद