महराजगंज। शीतलहर और घने कोहरे के बीच तराई के लोग सर्दी की ठिठुरन भरी दुश्वारी झेल रहे हैं। मंगलवार को सुबह कोहरे का घनत्व तो पूर्ववत रहा लेकिन पछुआ की रफ्तार कम रही। हालांकि दोपहर बाद पछुआ की बढ़ती रफ्तार ने गलन बढ़ाई। दृश्यता का ग्राफ कम रहा और अधिकतम तापमान 17 तो न्यूनतम 9 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। जनपदवासी पूस के जाड़े में राहत का इंतजाम करने में जुटे हैं। घने कोहरे के बीच बर्फीली हवा का प्रभाव इस कदर बढ़ता जा रहा कि घर में दुबकने के बाद गलन से निजात नहीं मिल रही। दृश्यता की बात करें तो यह 100 मीटर से अधिक नहीं हो सकी। सड़क पर वाहनों की रफ्तार काफी धीमी रही। वाइपर और हेडलाइट जलाने के बाद भी शीशों को चार से पांच किमी के अंतराल पर साफ करना चालकों की मजबूरी रही। तेज पछुआ कोहरे को बारिश की शक्ल देकर मिट्टी को तेजी से नम बना रहा। लेकिन इस नमी को कृषि विभाग पाला की संज्ञा देकर नुकसानदायक करार दे रहा है।
जिला कृषि अधिकारी शैलेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि फसल को पाला से बचाने के लिए खेत में हल्की सिंचाई के लिए जरूर प्रेरित किया जा रहा है लेकिन पछुआ से टपकती ओस की बूंदें मिट्टी को नम नहीं बल्कि फसल पर एक तरह पाले की तरह ही असर डालेंगी। कोहरे में प्रदूषित तत्व समाहित हैं साथ ही छंट कर टपकती बूंदे काफी सर्द होती हैं।