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Maharajganj News: 25 साल पहले शुरू हो गई थीं गन्ना किसानों की दुश्वारियां

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घुघली। क्षेत्र के गन्ना किसान 31 अक्तूबर 1999 का दिन कभी नहीं भूलेंगे। इसी दिन को घुघली चीनी मिल बंद होने से 928 कर्मचारी बेरोजगार हो गए और स्थानीय किसान भी गन्ने की फसल को लेकर दूसरे शुगर मिल का चक्कर लगाने लगे। किसानों की परेशानी धीरे-धीरे बढ़ती चली गई और अब किसानों का गन्ना से मोहभंग हो रहा है। क्षेत्र में गन्ना किसानों की संख्या में लगातार गिरावट दर्ज की गई। वर्तमान समय में नाममात्र के किसान ही गन्ना की बोवाई कर रहे हैं।
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स्थानीय लोगों को कसक है कि लाखों लोगों की जिंदगी को प्रभावित करने के बाद भी बंद होते शुगर मिलों का मुद्दा कभी चुनावी चर्चा का विषय नहीं बनता। लोगों को उम्मीद है कि राजनीतिक पार्टियां गंभीरता से काम करतीं तो घुघली चीनी मिल चालू होने में देर नहीं लगती और क्षेत्र में फिर से गन्ने की फसल लहलहाने लगती। मिल कर्मचारी राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि पंजाब के लाला केशर राम नारंग ने 1920 में पंजाब शुगर मिल की स्थापना की थी। मिल स्थापित होने के बाद घुघली ने प्रदेश के नक्शे पर अपनी जगह बना ली थी। घुघली के विकास पर उस समय ग्रहण लग गया जब स्थापना के 78वें वर्ष बाद मिल बंद होने का ऐलान हुआ। कर्मचारी रवि प्रताप सिंह व गंगा प्रसाद ने बताया कि मिल बंद होने को कोई भी राजनीतिक दल चुनावी मुद्दा नहीं बनाता है।
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