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Maharajganj News: चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकने ही विकास का मार्ग खुलेगा

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पीजी कॉलेज में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद अतिथि।
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भारतीय वैश्विक परिषद द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय संगोष्ठी का हुआ उद्घाटन
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भारत बिना स्वार्थ के पड़ोसियों की सहायता के लिए रहता है तत्पर: प्रो सुनीता
महाराजगंज। पाकिस्तान महत्वपूर्ण अर्चन है इसलिए पड़ोस नीति में भारत को संशोधन करना पड़ रहा है। चीन के साथ आंतरिक संबंध और दिन-प्रतिदिन भारत के आंतरिक विषयों में हस्तक्षेप करने से भारत और पाकिस्तान के रिश्ते दिन खराब होते जा रहे हैं। चीन के बढ़ते प्रभुत्व को रोकना होगा। तभी राजनीतिक और स्थिरता रुकेगी और विकास का मार्ग खुलेगा।
उक्त विचार जवाहरलाल नेहरू स्मारक पीजी कॉलेज में भारतीय वैश्विक परिषद नई दिल्ली और राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से आयोजित भारत की ''पड़ोसी प्रथम'' नीति एवं दक्षिण एशिया में बढ़ती राजनीतिक और अस्थिरता विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार ने मंगलवार को उक्त विचार व्यक्त किया।
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डॉ. अमित कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि पड़ोस नीति के लिए सम्मान संवाद समृद्धि और संस्कृति को विकसित करना होगा तथा आर्थिक इमिटेशन और अंतिम भारत प्रोटेस्ट के क्रम में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाना होगा तभी पड़ोसी नीति का सही स्वरूप दिखेगा यह नीति कोई नई नीति नहीं है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में हीरालाल रामनिवास पीजी कॉलेज के राजनीति विज्ञान के पूर्व विभागाध्यक्ष एवं पीजी कॉलेज महाराजगंज के पूर्व प्राचार्य प्रो. दिग्विजय नाथ पांडे ने कहा कि भारत की ''''पड़ोसी प्रथम'''' नीति का उद्देश्य दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के साथ संवाद, सहयोग और शांतिपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना है, लेकिन क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और चीन के बढ़ते प्रभाव ने इस नीति के समक्ष गंभीर चुनौतियां पेश की हैं।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थनगर के लोक प्रशासन विभाग की अध्यक्ष डॉ. सुनीता त्रिपाठी ने कहा कि पड़ोस नीति प्रासंगिक विषय है पड़ोसियों को परिवार के रूप में देखना होगा। भारतीय वैश्विक परिषद नई दिल्ली के प्रतिनिधि डॉ. अरशद अली ने राजनीतिक अस्थिरता म्यांमार में सैन्य शासन और बांग्लादेश में आंतरिक उथल-पुथल ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में सुरक्षा और शरणार्थियों की समस्या उत्पन्न की है।
संगोष्ठी के समन्वयक आयोजन सचिव राजनीति विज्ञान के प्रभारी डॉ. राहुल कुमार सिंह ने दिशा प्रवर्तन करते हुए आर्थिक चुनौतियां तथा पड़ोसी देशों में अस्थिरता के कारण व्यापार बाधाएं और ऊर्जा परियोजनाओं में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है।
अध्यक्षता करते हुए प्रबंधक डॉ. बलराम भट्ट ने समावेशी दृष्टिकोण भारत को अपनी नीति में छोटे देशों की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. अजय कुमार मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। उद्घाटन सत्र का संचालन डॉ. दिवाकर सिंह ने किया जबकि सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापन डॉ. पीयूष जायसवाल ने किया। राष्ट्रीय संगोष्ठी में पंजीकरण का कार्य छट्ठू यादव, डॉ. धर्मवीर, डॉ विनय कुमार खरवार, डॉ मृत्युंजय तिवारी ने किया।
सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु सिद्धार्थ नगर के राजनीतिक विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉक्टर सरिता सिंह हीरालाल रामनिवास पीजी कॉलेज खलीलाबाद के डॉक्टर पी एन सिंह, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय संबंध शिक्षक संघ के अध्यक्ष डॉ शशिकांत राव, डीबीएन डीसी कॉलेज गोरखपुर के डॉक्टर गोपाल सिंह मौजूद रहे।
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दो तकनीकी सत्र में 36 शोध पत्र प्रस्तुत
भारत की पड़ोसी प्रथम नीति एवं दक्षिण एशिया में बढ़ती राजनीतिक और अस्थिरता विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के प्रथम दिन दो तकनीकी सत्र संचालित किए गए प्रथम तकनीकी सत्र में लाल बहादुर शास्त्री पीजी कॉलेज आनंद नगर के डॉक्टर शिव प्रताप सिंह डॉक्टर प्रवीण कुमार मिश्रा तथा डीवीएनडीसी पीजी कॉलेज गोरखपुर के डॉक्टर गोपाल सिंह के निर्देशन में प्रथम तकनीकी सत्र में 12 ऑनलाइन और 6 ऑफलाइन शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। जिसमें शोधार्थी मोनिता यादव सिमरन यादव डॉ. दिनेश पटेल गायत्री पटेल शुभम प्रजापति सहित द्वितीय तकनीकी सत्र में हीरालाल रामनिवास पीजी कॉलेज खलीलाबाद के डॉक्टर पी एन सिंह पीजी कॉलेज फरेंदा के प्रचार डॉ. राम पांडे पीजी कॉलेज खलीलाबाद के डॉक्टर शशिकांत राव एपीएन पीजी कॉलेज बस्ती के डॉ. राजीव कुमार सिंह के निर्देशन में द्वितीय तकनीकी सत्र में 11 ऑनलाइन और 7 ऑफलाइन शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। तकनीकी सत्र का संचालन डॉ. प्राची कुशवाहा डॉ. अपर्णा राठी डीआर ज्योत्सना पांडेय ने किया।
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