मानव जीवन पर वन्य जीवों का बढ़ते खतरे को लेकर सताने लगी है चुनौतियां
प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने से हिंसक हो रहे तेंदुए, बढ़ने लगी चुनौतियां
वन विभाग ने बंद कमरे में सोने का किया आग्रह
महराजगंज/निचलौल। तेंदुए के खौफ से वन क्षेत्र के किनारे बसे गांव के लोगों की रात खौफ में गुजर रही है। ग्रामीण मवेशियों समेत स्वयं की सुरक्षा को लेकर चिंता है। बीते दिनों लगातार तेंदुए के हमले से लोगों के घायल होने के मामले सामने आ रहे हैं। यहां तक कि दो लोगों की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में वन विभाग के टीम की मौजूदगी के बाद भी लोग दहशत में हैं। वनकर्मी गश्त कर रहे हैं और तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा भी लगा दिया है।
सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग अंतर्गत जंगलों का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने से तेंदुए बाहर निकलकर आबादी की ओर आ रहे हैं। तेंदुए भोजन के लिए पालतू पशुओं के साथ ही इंसानों को भी शिकार बना रहे हैं। इसके चलते आम लोगों के साथ ही संबंधित जिम्मेदारों की चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। रिहायशी इलाकों में तेंदुए की चहलकदमी से लोगों में दहशत बनी हुई है। निचलौल वन रेंज क्षेत्र से सटे गांव बढ़या गांव के टोला गेठीहवा में मां को ढूंढने निकली शैरुन निशा को तेंदुआ हमला कर मार डाला था। बीते दिनों लक्ष्मीपुर वन रेंज क्षेत्र के जंगल से सटे गांव बेलहिया के सिवान में तेंदुए के हमले में पांच लोग घायल हो गए थे। 20 जनवरी की आधी रात में मधवलिया वन रेंज के जंगलों के बीच स्थित वन ग्राम कंपार्ट 24 में एक झोपड़ी के अंदर घुस तेंदुए ने मां की गोद में सो रही शिवानी को घायल कर दिया।
इन क्षेत्रों के लोग अपनी और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। रात में भी लगातार क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। जंगलों से सटे बस्तियों के बुजुर्ग कोमल यादव, जितई, रानू आदि ने बातचीत में बताया कि करीब दो दशक पहले वन्य जीव सीधे मानव बस्तियों की ओर रुख नहीं करते थे। क्योंकि पहले जंगलों में लोगों का आवागमन नहीं होने के साथ ही उन्हें जंगलों के भीतर ही पर्याप्त भोजन मिल जाता था। कभी-कभार ही ऐसे मामले सुनाई देते थे कि तेंदुए ने गांव में किसी मवेशी या इंसान को नुकसान पहुंचाया हो। लेकिन वर्तमान समय में ऐसी घटनाएं बढ़ गई हैं।
निरंतर मानव और वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ती चली जा रही
निचलौल क्षेत्र के राष्ट्रीय इंटरमीडिएट कॉलेज के भूगोल प्रवक्ता डॉ. संजय राय ने बृहस्पतिवार को बातचीत के दौरान बताया कि बेजुबान वन्यजीवों को अकेले दोषी नहीं ठहराना जा सकता है। ना ही इसेसे कोई हल निकल सकता है। देखा जाए तो मनुष्य ही इस बढ़ती चुनौतियों के लिए ज्यादा जिम्मेदार है। क्योंकि मानव आबादी बढ़ने से उसका वन्यजीव आवासों में विस्तार होता जा रहा है। इस वजह से वन्य जीवों का रहन-सहन और भोजन प्रभावित हो रहा है। यह स्थिति वन्य जीवों को मानव बहुल क्षेत्रों में भोजन और आश्रय खोजने के लिए मजबूर करती है। यही कारण है कि निरंतर मानव और वन्य जीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ती चली जा रही है।
जंगल में भोजन नहीं मिलने पर आते हैं तेंदुए
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूटीआई) के प्रॉजेक्ट मैनेजर अरशद हुसैन ने कहा कि वन्य जीवों का एक क्षेत्र होता है। जब उस क्षेत्र में हलचल बढ़ती है। तो वह वन्य जीव प्रभावित होते हैं। एक नर तेंदुए का क्षेत्र करीब 16 से 18 वर्ग किमी के बीच होता है। इतने क्षेत्र में नर तो एक ही रहता है। लेकिन मादाएं अधिक भी हो सकती हैं। साथ ही नर तेंदुओं के बीच आपसी संघर्ष में कमजोर तेंदुआ तीन-चार किमी के दायरे में ही अपना आवास ढूंढता है। जंगलों में भोजन नहीं मिलने से तेंदुए सीधे आबादी में पहुंच रहे हैं। पालतू जानवरों के शिकार करने के दौरान उनका संघर्ष इंसानों से हो रहा है।
मासूम के स्वास्थ्य में सुधार, दहशत बरकरार
निचलौल। मधवलिया वन रेंज के घने जंगलों के बीच स्थित वनटांगिया कंपार्ट 24 में बीते मंगलवार आधी रात को झोपड़ी के घर में मां के गोद में सोई चार वर्षीय मासूम शिवानी को तेंदुए ने हमला कर घायल कर दिया था। घायल मासूम का इलाज जारी है। परिजनों के मुताबिक, बालिका के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। वहीं दूसरी ओर बस्ती में लोगों में अभी भी तेंदुए की दहशत बरकरार है। वन कर्मियों की टीम बस्ती में मौजूद है और हालात पर नजर रख रही है।
बृहस्पतिवार को ग्रामीण सोनू, संदीप, अंगद, बृजेश आदि ने बताया कि बस्ती में आकर तेंदुए का हमला कोई नया मामला नहीं है। आबादी मधवलिया वन रेंज के घने जंगलों के बीच स्थित है। यही कारण हैं कि तेंदुए अक्सर जंगल से निकल आबादी से सटे खेतों में शिकार की तलाश में आकर छिपे रहते हैं। सुनसान मिलने पर आबादी के अंदर घुसकर हमला भी कर देते हैं। लोगों ने आबादी के चारों को तार से घेराबंदी कराने की मांग की।
मधवलिया वन क्षेत्राधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि घायल शिवानी को कल ही आईसीयू वार्ड से जनरल वार्ड में कर दिया गया था। मासूम के स्वास्थ्य में काफी सुधार है। घायल मासूम के परिजनों से निरंतर वार्ता कर जानकारी ली जा रही है। शिवानी के घर पर वन कर्मियों की टीम मौजूद है। डीएफओ के साथ वनटांगिया के अंदर रहने वाले लोगों को लाउडस्पीकर के जरिए जागरूक किया गया है। लोग घर में दरवाजा बंद करके सोएं। बरामदे और खुले जगहों पर न सोएं।
शक्तिशाली और चतुर होते हैं तेंदुए
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के एक सदस्य रविंद्र तिवारी ने कहा कि तेंदुआ बहुत शक्तिशाली और चतुर जीव है। इनकी एकाग्रता लाजवाब होती है। शिकार को पकड़ने की तकनीक और हमला करने की शैली इन्हें एक अव्वल दर्जे का शिकारी बनाती है। आमतौर पर ये निशाचरी होते हैं। तेंदुए 56 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकते हैं।