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Maharajganj News: रमजान का पहला अशरा खत्म, दूसरा अल्लाह से माफी मांगने का शुरू

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अल्लहा ने इस मुबारक महीने (रमजान) को तीन अशरों में बांटा है
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महराजगंज। रमजान का पूरा महीना मोमिनों के लिए अल्लाह की तरफ से अजमत, रहमत और बरकतों से लबरेज है। अल्लाह ने इस मुबारक महीने को तीन अशरों में बांटा है। जामिया रिज़विया नुरुल उलूम महराजगंज के मौलाना अमजद निजामी के अनुसार, इस्लाम में रमजान के महीने को दस-दस दिन के तीन अशरों (भागों) में बांटा गया है। पहले दस दिन रहमत का अशरा होता है।
शनिवार को दस रोजे पूरे होने के साथ रमजान का पहला अशरा पूरा हो गया। रविवार से रमजान का अल्लाह से मांफी मांगने का दूसरा अशरा शुरू हो गया। दूसरा अशरा रमजान के बीसवें रोजे के सूरज डूबने तक रहेगा। दूसरे अशरे में रोजेदार रोजे रखकर अल्लाह से माफी की दुआ करते हैं। इस दौरान अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा की जाती है।
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इस्लामिक मान्यता के मुताबिक, रमजान के दूसरे अशरे में जो मुसलमान दिन में रोजा रखता है, रात में तराबी की नमाज पढ़कर अपने गुनाहों के लिए माफी मांगता है, तो अल्लाह अपने बंदों को माफ करते हैं। रमजान का तीसरा अशरा 21वें रोजे से शुरू होकर चांद के हिसाब से 29वें या 30वें रोजे तक चलता है। ये अशरा सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
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तीसरे अशरे का उद्देश्य जहन्नुम की आग से खुद को सुरक्षित रखना है। इस दौरान हर मुसलमान को जहन्नुम से बचने के लिए अल्लाह से दुआ करते हैं। रमजान के आखिरी अशरे में एहतकाफ में पहरेजगार मुसलमान् मस्जिद के कोने में 10 दिनों तक एक जगह बैठकर अल्लाह की इबादत करते हैं और अपने परिवार वालों के साथ मोहल्लों,गांव वालों के लिए जहन्नुम से आजादी की दुआ करते हैं।
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