महराजगंज। जनपद के स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत सांस्कृतिक कार्यक्रमों से हुई। देर शाम बाॅलीवुड नाइट में गायक अंकित के गीतों पर दर्शक जमकर थिरके।
आयोजन में जहां विभागीय स्टाल पर लोगों की भीड़ योजनाओं की जानकारी लेने के साथ-साथ पंजीयन करती दिखी वहीं शिल्पग्राम में हाथों का कमाल लोगों को आकर्षित करने में सफल होता दिखा। शिल्पग्राम स्टालों पर कश्मीर से आए ऊनी वस्त्र व अन्य स्थानों की रेशमी से लेकर बनारसी साड़ियों ने खूब लुभाया जिनकी बिक्री से उद्यमियों का उत्साह भी मजबूत दिखा।
स्थानीय उत्पादों में जैविक उत्पादों की जहां मजबूती दिखी, वहीं हरदोई व कन्नौज के इत्र व धूपबत्ती की सुगंध ने महोत्सव में आए लोगों को बरबस अपनी तरफ आकर्षित किया। सुबह 10 बजे से लेकर देर रात तक महोत्सव स्थल जवाहर लाल नेहरु पीजी कालेज का मैदान पूरी तरह गुलजार रहा। जनपद वासियों की भीड़ कार्यक्रमों का लुत्फ उठाने के दौरान फूड कोर्ट में जायका लेने से नहीं चूके। शाम को कार्यक्रम का शुभारंभ सदर विधायक जयमंगल कन्नौजिया, केएमसी मेडिकल काॅलेज के चेयरमैन विनय कुमार श्रीवास्तव, नगर पालिका महराजगंज चेयरमैन पुष्पलता मंगल, डीएम संतोष कुमार शर्मा व एसपी सोमेंद्र मीणा ने संयुक्त रूप से किया।
बेटियों के हरियाणवी नृत्य पर रीझे दर्शक : महोत्सव का मंच शनिवार सुबह 10 बजे अंतर्जनपदीय सांस्कृतिक गतिविधियों से गुलजार रही। पहला कार्यक्रम समूह नृत्य का रहा जिसमें हरियाणवी गीत पर नृत्य करती राजकीय माध्यमिक स्कूल की 16 छात्राओं ने कुछ ऐसी प्रस्तुति दी जैसे वह पढ़ने वाली बालिकाएं नहीं बल्कि पेशेवर कलाकार हों। इसके बाद एक से बढ़कर एक सामूहिक व एकल नृत्यों के साथ गीतों ने सुर संग्राम सरीखा एहसास कराया।
पहले दिन 39 स्कूल के सांस्कृतिक आयोजन था वही शनिवार को 49 स्कूलों के बच्चे अपने प्रदर्शन से मंच को जीवंत करते रहे। महराजगंज इंटर काॅलेज की बेटियों ने स्कुलवा में नमवा लिखा द सुनाकर बालिका शिक्षा का महत्व बताने का प्रयास किया। अध्यापक पंकज मौर्य के निर्देशन में डिजिटल हुई पढ़ाई एकांकी प्रस्तुत कर बेसिक स्कूल की बेटियों ने इसकी सार्थकता बताने के साथ दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। गुंजा व अन्य बेटियों का प्रदर्शन लोगों को काफी पसंद आया, जिसमें जल-जंगल-जीवन में संस्कृति के महत्व को व्यक्त करने का प्रयास अभिनय के जरिए किया गया। पर्यावरण के दृष्टिकोण से जरूरी है जलवायु परिवर्तन पर विराम कार्यक्रम प्रस्तुत कर संदेश देने का कार्य किया। स्कूलों का कार्यक्रम शाम तीन बजे तक चला। सांस्कृतिक गतिविधियों की नोडल जिम्मेदारी डीपीआरओ श्रेया मिश्रा, बीएसए रिद्धि पांडेय व सूचना अधिकारी के जिम्मे रही। इसके बाद शाम बनाने की जिम्मेदारी स्थानीय कलाकारों ने निभाई और लोक संगीत का कुछ ऐसा माहौल बनाया कि महोत्सव की शाम लोगों को सुहानी लगी और भीड़ से पंडाल भरा रहा।
शिल्पग्राम में राजस्थान व कश्मीर से पहुंचे उत्पाद- महोत्सव स्थल के शिल्पग्राम में राजस्थान की जोधपुरी फुटवियर तो कश्मीर से पहुंची भेड़ ऊन के उत्पाद सर्वाधिक बिक्री वाले उत्पाद बने। दूसरे नंबर पर बनारसी व रेशमी साड़ी, जरी जरदोजी, जूट व केला रेशा उत्पाद रहे। मुरादाबाद का पीतल उत्पाद, जम्मू से पहुंचे ड्राई फ्रूट भी खूब बिके।