सुधर नहीं सकी नगरीय विद्यालयों की दशा
ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों का हो रहा कायाकल्प, शहरी क्षेत्र की उपेक्षा
महराजगंज। आधुनिक युग में हर कोई गांव से शहर की तरफ पहुंचने की चाह रख रहा है, लेकिन कुछ ऐसी व्यवस्था भी है जो गांवों में नगरों से काफी अच्छी है। ऐसी ही व्यवस्था कायाकल्प योजना में देखने को मिल रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में जहां कायाकल्प से विद्यालयों की सूरत बदल रही है, वहीं नगरीय क्षेत्र में यह योजना प्रभावी न होने से कई विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं खस्ताहाल हैं।
परिषदीय विद्यालयों की दशा को सुधारने को लेकर ग्रामीण व नगरीय क्षेत्रों में कायाकल्प योजना बनाई गई है। फर्क यह है कि पंचायती राज विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में जहां सुधार के लिए पहल की जा रही है, वहीं नगरीय क्षेत्र के जिम्मेदार इसे लेकर गंभीर नहीं हैं। नगर पालिका परिषद महराजगंज सीमा में लगभग दो दर्जन ऐसे विद्यालय हैं जिनमें बुनियादी सुविधाओं की कमी है।
प्राथमिक विद्यालय सदर द्वितीय में 172 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। सक्सेना चौक के पास स्थित इस विद्यालय में एकल कक्ष की वजह से कुछ बच्चे खुले में बैठकर पढ़ते हैं। विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है। शौचालय व पेयजल व्यवस्था बदहाल है।
प्राथमिक विद्यालय पड़री बुजर्ग में 149 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। नगर में होने के कारण इस विद्यालय का भी विकास प्रभावित है। विद्यालय में चहारदीवारी नहीं है। शौचालय भी बदहाल है।
कंपोजिट विद्यालय धनेवा-धनेई में 330 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। यहां एक शौचालय जर्जर है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय बैकुंठपुर में 95 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। यहां पर फर्श टूटा है। शौचालय की व्यवस्था बदहाल है। मुख्य मार्ग से विद्यालय तक पहुंचने के लिए करीब 50 मीटर का रास्ता कच्चा है।
नगर पालिका बोर्ड को करनी होगी पहल : ईओ
नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी आलोक कुमार सिंह ने कहा कि नगर क्षेत्र में भी कायाकल्प योजना से विद्यालयों के सुधार पर कार्य कराया जा सकता है। शर्त यह है कि इसके लिए बोर्ड की मंजूरी के बाद प्रशासन से अनुमति ली जाए। इस दिशा में पहल की जाएगी।