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Maharajganj News: बीमारी के हिसाब से दलालों का कमीशन तय

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निचलौल में अवैध ​क्लिनिक की जांच करने पहुंचे नोडल अ​धिकारी। 
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महराजगंज। जिले में अवैध अस्पतालों का इतना मजबूत है कि सरकारी अस्पतालों से भी उन्हें मरीज मिल जाते हैं। यहां आने वाले मरीज तरह-तरह से आर्थिक शोषण के शिकार होते हैं। ज्यादा से ज्यादा मरीजों को अस्पताल लाने के लिए निजी अस्पताल संचालक बीमारी के हिसाब से दलालों को कमीशन देते हैं। ऑपरेशन से लेकर गंभीर बीमारियों तक का कमीशन तय रहता है।
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सूत्रों की माने तो निजी अस्पताल संचालकों की पहुंच सरकारी अस्पतालों में तैनात कर्मचारी से लेकर डॉक्टर तक होती है। वे इस बात पर भी निगाह रखते हैं कि संबंधित सीजन में कहां ज्यादा मरीज आ रहे हैं। उसी हिसाब से वह दलालों को सक्रिय करते हैं। दलालों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि इसे समझना भी एक चुनौती है। बातों की जाल में आसानी से फंसाकर दलाल तीमारदार को सहमत कर लेते हैं। संबंधित अस्पताल में मरीज को पहुंचाने के बाद दलाल को पांच हजार रुपये तत्काल मिल जाते हैं। मरीज का इलाज लंबा चलता है और उसके तीमारदार देने की हैसियत में हैं तो दलाल को 20 हजार रुपये तक मिल जाते हैं। जिले में अवैध अस्पताल ही नहीं पंजीकृत अस्पतालों में भी दलालों का नेटवर्क काम करता है। नेपाल से भी मरीज लाने के लिए पूरी व्यवस्था होती है। पड़ताल के दौरान चौकानें वाली बात सामने आईं।
बुधवार को झुलनीपुर बार्डर के पास चाय की दुकान में बैठकर एक झोलाछाप महराजगंज के एक नामी अस्पताल का बखान कर रहा था। उसकी बात कई लोग सुन रहे थे। बगल में ही चाय पी रहे जियावन प्रसाद ने उससे पूछा कि पथरी का ऑपरेशन कराना है। सस्ते में कहीं हो जाय तो बताईए। झोलाछाप ने अस्पताल का पता बताने के साथ ही संबंधित अस्पताल के कर्मी से बात कर नंबर उनको दे दिया। जिसे आपरेशन कराना है। उसे भनक भी नहीं लगी। झोलाछाप ने अपना काम कर दिया।
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मरीजों को अस्पतालों में भेजने के लिए नेपाल भी नेटवर्क काम कर रहा है। भारतीय क्षेत्र से दलाल नेपाल में भी अपनी बैठ बना लिए हैं। ठूठीबारी और झुलनीपुर के पास टेंपो टैक्सी लगी रही है। इससे आने पर किसी को भनक भी नहीं लगती है।
ऑपरेशन में दलालों को मिल जाते हैं पांच से दस हजार रुपये : सूत्र बताते हैं कि भारतीय क्षेत्र के दलाल नेपाल में डॉक्टरों से संपंर्क कर उनको कमीशन देते हैं। इसके बाद मरीज भारतीय क्षेत्र में आते हैं। सूत्रों की मानें में आपरेशन वाले केस में दलाल को पांच से दस हजार रुपये बच जाते हैं।
महराजगंज तक ही नहीं दलाल गोरखपुर तक मरीजों को भेजने की व्यवस्था कर रखे हैं। एंबुलेंस पर सबकी नजर रहती है। इस कारण दलाल टैक्सी व बस का सहारा लेते हैं। बताया कि जाता है कि सामान्य तौर पर एक दलाल माह भर में कम से कम 50 हजार रुपये कमा लेता है। भागदौड़ करने में उसके 10 हजार रुपये खर्च हो जाते हैं। यह आमदनी तो सामान्य तौर पर होती है। मरीजों की बीमारी के हिसाब से कमीशन घटता-बढ़ता रहता है।
जिले में संचालित प्राइवेट अस्पताल, क्लिनिक सेंटर व नर्सिंग होम की निगरानी न होने से मरीजों के साथ आए दिन घटनाएं बढ़ रही हैं। प्राइवेट क्लिनिक सेंटर व नर्सिंग होम संचालक पैसे की लालच में मरीजों को भर्ती तो कर लेते हैं, लेकिन प्रशिक्षित चिकित्सक व पर्याप्त संसाधन न होने का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। बीते तीन-चार महीने में कई अस्पताल व नर्सिंग होम में मरीजों को जान गंवाना पड़ा है।
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