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Maharajganj News: वन्यजीवों को भा रही सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग की आबोहवा

Mon, 03 Feb 2025 01:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज/निचलौल। वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में बेहतर कार्य योजना तैयार की गई है। यही कारण है कि जंगलों में वन्य जीवों का कुनबा बढ़ रहा है। वन क्षेत्र में बेंत की बहुलता वाले इस जंगल की कंटीली झाड़ियां और नारायणी नदी का दलदली भूभाग इन्हें लुभा रहा है।
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इतना ही नहीं वन्य जीवों की सुरक्षा को लेकर वनकर्मी भी पेट्रोलिंग के जरिए निगरानी कर रहे हैं। इस वन क्षेत्र में हिरन, बंदर सहित अन्य जानवरों के अलावा तेंदुओं की काफी अच्छी संख्या भी पाई जाती है। आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में 67 तेंदुओं की संख्या वन क्षेत्र में है।
जानकारी के मुताबिक, सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के अंतर्गत नारायणी नदी के किनारे बसा निचलौल वन रेंज की आबोहवा वन्यजीवों को भा रही है। वन कर्मियों की लगातार पेट्रोलिंग के चलते वन्यजीव खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। लगातार हिरन और तेदुओं की बढ़ती संख्या इसका उदाहरण है। आंकड़ों के मुताबिक वन रेंज क्षेत्र में तेदुओं की संख्या लगभग 67 पहुंच गई है। इसी तरह हिरन सहित अन्य जानवरों की संख्या में भी लगातार इजाफा हुआ है।
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वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अनुकूल परिस्थितियों के चलते ही ये संभव हुआ है। पेट्रोलिंग के दौरान लगातार वन्यजीवों को चहलकदमी करते देखा जा रहा है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक वन रेंज का कुल क्षेत्रफल 6823.10 हेक्टेयर है। जो उत्तरी, दक्षिणी, डोमा, गंडक, कलनहीं, चरगहा, सिसवा और निचलौल बीट में बंटा है। इन वन क्षेत्रों में निवास करने वाले वन्यजीवों के लिए उत्तरी, दक्षिणी, डोमा और निचलौल बीट के घने जंगलों के बीच वाटर टैंक भी बनाया गया है।
इस रेंज में गुदगुड़िया ताल, चंदमणि ताल, झवई ताल, मंझरिया ताल, दर्जिनिया ताल जैसी कई आर्द्रभूमियां हैं। इतना ही नहीं यहां पर छोटी गंडक नदी भी है। रेंज में डोमा और निचलौल में दो वन विश्राम गृह भी हैं। सर्दियों के दौरान यहां वेस्टर्न ऑस्प्रे, लॉन्ग-लेग्ड बजर्ड, ओरिएंटल हनी-बज़र्ड जैसे शिकारी पक्षी भी देखे जाते हैं। निचलौल वन क्षेत्राधिकारी सुनील राव ने बताया कि वन विभाग की ओर से वन रेंज क्षेत्र में वन्यजीवों की सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। सुरक्षा के कारण ही वन्यजीवों की संख्या में इजाफा हुआ है। विभाग के कर्मचारी गंभीरता से जंगलों की सुरक्षा में डटे हैं। इसे और बेहतर करने का प्रयास है।
वन से घिरा है जनपद का 342 वर्ग किमी क्षेत्र : महराजगंज जनपद 342 वर्ग किमी क्षेत्र वन से घिरा है, जो जिले के करीब 11.59 प्रतिशत क्षेत्र के बराबर है। यह जिला वन से घिरे होने के कारण काफी हरा-भरा रहता है। गोरखपुर वन क्षेत्र से 1987 में अलग होकर वन्य जीव अभ्यारण्य बना सोहगीबरवा सेंचुरी नेपाल के चितवन पार्क और बिहार के वाल्मीकिनगर टाइगर रिजर्व के वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर में शामिल है। तीनों वन क्षेत्र एक-दूसरे से सटे हैं। नेपाल के चितवन पार्क से गैंडा, भालू यहां आते रहते हैं। वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व के बाघों की यहां साइटिंग होती रहती है।

वन्य जीवों की संख्या पर एक नजर
वन के अंदर वन्य जीवों का कुनबा बढ़ रहा है। उनके संर्वधन पर जोर है। सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में तेंदुओं की संख्या 67 हैं। चीतल 2004, सांभर 469, नीलगाय 2494, जंगली सुअर 3803, बंदर 7586, लंगूर 4916, सियार 1285, जंगली बिल्ली 113, मगरमच्छ 166, काकड़ 416, खरगोश 573, वनगाय 680 की संख्या में मौजूद हैं।
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