महराजगंज। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी डिग्री पर नौकरी कर रही अध्यापिका सुमन को बर्खास्त कर दिया गया है। लेकिन विभाग में यह कोई पहला मामला नहीं है। यहां जालसाजों का नेटवर्क इतना मजबूत है कि अक्सर ऐसे मामले सामने आ ही जाते हैं। दो-तीन माह पहले भी एक अध्यापिका को बर्खास्त कर उसके खिलाफ दर्ज कराया गया था। इस मामले में भी कार्रवाई ठंडे बस्ते में है। जिम्मेदार जांच होने की बात कर किनारा कस लेते हैं।
सूत्र बताते हैं कि जिले में फर्जी प्रमाण के आधार पर नौकरी करने वाले समय-समय पर दबोचे गए। साल भर पहले एसटीएफ ने भी कुछ संदिग्ध शिक्षकों की कुंडली को खंगाला था। सरकारी स्कूल में नहीं एडेड में भी नियुक्ति में मनमानी का खेल हुआ।
अपनी पहुंच का फायदा उठाकर धंधेबाज मनमानी करते हैं और मोटी रकम कमाते हैं। नियम कानून के पेंच में मामले में उलझाकर किनारा कस लेते हैं। यही वजह है कि मामले में जल्दी कार्रवाई नहीं हो पाती है। बीते माह सदर क्षेत्र में एडेड स्कूल में प्रधानाध्यापिका को बर्खास्त करने के साथ ही केस दर्ज कराया गया था, इसमें भी भ्रष्टाचार के तार कार्यालय से जुड़ने की बात सामने आई थी, लेकिन कार्रवाई के बाद अन्य प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।
सूत्रों की मानें तो विभाग में कुछ ऐसे लोग हैं, जो इस तरह की व्यवस्था बनाकर गड़बड़झाला कराते हैं। यहीं वजह है कि ज्यादातर मामले में उलझे रहते हैं, इसमें कानूनी दांव-पेच के कारण कोई हाथ नहीं डालना चाहता है। मोटी रकम वसूल कर धंधेबाज किनारे हो जाते हैं। एक पूरा नेटवर्क में इसमें जुड़ा हुआ है जो तैनाती से लेकर डिग्री बनाने के धंधे में जुटा है, इस वजह से एसटीएफ ने भी जांच पड़ताल शुरू की थी।
सूत्रों की मानें तो एक चर्चित बाबू इस इस तरह के खेल का मास्टर माइंड है। उसके खिलाफ जिम्मेदार कार्रवाई से परहेज करते हैं। अगर कोई कार्रवाई की बात सोचता भी है तो उसे नियम कानून के पेच में उलझाकर खामोश करा दिया जाता है।
नियुक्ति में फर्जीवाड़े को लेकर अक्सर मामला सामने आता रहता है, लेकिन इस पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पा रहा है।