महराजगंज। लोकसभा महराजगंज में जनता जब भी रूठती है तो वोट की चोट कर अपने समझदारी का परिचय देती है। इसे समझने में भाजपा माहिर है। वर्ष 1991 से अब तक सिर्फ दो बार 2009 व 1999 में जनता भाजपा से दूर हुई है। इन सभी बातों पर चर्चा अब हो रही है। युवा वोटरों का रूझान भी भाजपा की ओर कम रहा। शहर में दुकानों से लेकर सरकारी कार्यालयों में बुधवार को चर्चा होती रही। सबके अपने-अपने विचार रहे, लेकिन हर किसी ने यही कहा कि इस चुनाव परिणाम से सबक लेने की जरूरत है।
शहर में मऊपाकड़ चौराहे पर स्थित कपड़े की दुकान पर चुनाव के नतीजों पर युवा व्यापारी चर्चा करते दिखे। सभी भाजपा को लेकर अपने विचार प्रकट कर रहे थे। गठबंधन की मजबूती पर भी चर्चा हो रही थी। दुकान पर बैठे युवा कारोबारी अनुभव कहने लगे की इस बार बहुत कुछ समझ में नहीं आया। लोग जो बोल रहे थे वे संबंधित के पक्ष में वोट के रूप से नहीं बदले। इस वजह से भाजपा को मजबूती मिली। गठबंधन ने भी युवाओं काे अपनी तरफ खिंचा, लेकिन कुछ खास सफलता नहीं मिली।
पास में बैठे अभिषेक कहने लगे की कारोबारी तो भाजपा की शुरू से ही परपंरागत वोटर रहे हैं। इसमें कोई अब तक सेंध नहीं मार सका है। वर्ष 2009 व 1999 में भी कारोबारियों ने वोट पोल किया था, लेकिन उस वक्त भाजपा को हार मिली थी। यहां का कारोबारी हमेशा साथ देता है। विकास सिंहानिया कहने लगे की सबके अपने-अपने विचार होते हैं। जो व्यक्ति जिस विचारधारा का होगा, उसका झुकाव भी वैसे ही विचारधारा वाले दल की ओर रहेगा। महराजगंज लोकसभा भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां तो लोग रूठते हैं तो वोट के चोट से ही संकेत देते हैं, इसे समझने की जरूरत है।
इनको रोकते हुए रमेश रौनियार कहने लगे की पीएम मोदी की छवि ऐसी है कि जनता उनसे दूर नहीं हो सकती है। महराजगंज की जनता बहुत समझदार है, इस वजह से अपने निर्णय को दिखाकर सियासत के जानकारों के समीकरण को फेल कर दी। यह सुनकर संजय कश्यप व चंदन दूबे हंसने लगे। बोले की अब तो परिणाम पक्ष में आ गया तो अच्छा लग रहा है, लेकिन मतगणना के दौरान क्रिकेट मैच के स्कोर जैसा लग रहा था। हर बूथ पर टक्कर दिख रही थी।
इन कारोबारियों की बात चीत सुनने के कलेक्ट्रेट परिसर का हाल जाना गया तो यहां भी नजारा बदला दिखा। चुनावी भागदौड़ से फुर्सत मिलने पर कर्मचारी काम करते हुए चुनावी चर्चा कर रहे थे। सभी ने यही कहा की इस बार चुनाव में बहुत कुछ बदलाव दिखा। यह कोई सोच नहीं रहा था कि भाजपा के गढ़ में ऐसी टक्कर देखने को मिलेगी।
विकास भवन के दफ्तरों से कलक्ट्रेट में कोषागार में कर्मचारी चर्चा मसगुल दिखे। दिलीप श्रीवास्तव ने कहा कि सचमुच में स्थिति देखकर लग रहा था की परिणाम बदल सकता है, लेकिन शुरू से ही भाजपा की बढ़त कम हुई, लेकिन गठबंधन को आगे बढ़ने नहीं दी। इस वजह से जीत की राह आसान हुई। राजेश कहने लगे की परिणाम बता रहा है कि जनता जागरूक हो रही है, उसे ठीक नहीं लगेगा तो बदलाव कभी भी कर सकती है। वरुण, शैलेंद्र श्रीवास्तव, अभिमन्यु तिवारी, ओमप्रकाश, उमेश कुमार सभी ने एक स्वर में कहा कि अब तो जो होना था, वो हो गया है।