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Maharajganj News: एजेंट सुनाते थे खरी खोटी... दबाव में गई युवक की जान

Mon, 14 Jul 2025 12:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। बृजमनगंज थाना क्षेत्र के महदेवा में माइक्रो फाइनेंस कंपनी से कर्ज लेने वाली महिला किशलावती के पति श्रीराम तनाव में आ गए थे। वसूली करने वाले एजेंट रोजाना घर जाकर किस्त जमा करने का दबाव बनाते थे।
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चर्चा है कि उनकी खरी-खोटी बर्दाश्त नहीं होने की वजह से बीते दिन उसने जहर खाकर जान दे दी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि नहीं हुई। मौत संदिग्ध बताई जा रही है।
मृतक की पत्नी किशलावती ने बताया कि नौ समूह से कर्ज लिया गया है। अभी कुछ दिन पहले बेटी की शादी हुई है। एक समूह का कर्ज तो पूरा कर दिया गया। बाकी आठ का कर्ज जमा नहीं हो पाया है। सभी कंपनियों का करीब चार लाख रुपये कर्ज है। कंपनी के कर्मचारी घर आकर अपशब्द बोलते थे।
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कर्ज की रकम में 40 हजार जमा भी हुआ है। इधर घर की माली हालत ठीक नहीं होने से परेशानी हो रही थी। चार दिन पहले कंपनी के एजेंट वसूली करने आए थे। किस्त जमा करने के लिए दबाव बना रहे थे। उनकी ओर से अपमानजनक बातें की गईं। इससे पति श्रीराम काफी आहत हो गए। इनकी मौत को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
गांव में चर्चा है कि आहत होकर उन्होंने जहर खाकर जान दे दी तो कोई बीमार होने की बात कह रहा है। इस प्रकरण में मृतक की पत्नी भी मौत को लेकर सटीक जानकारी नहीं दे पा रही हैं। प्रकरण में उसने थाने में कोई शिकायत भी दर्ज नहीं कराई गई है।
श्रीराम मजदूरी करके परिवार का गुजर बसर करते थे। उनकी मौत के बाद पत्नी किशलावती देवी परेशान हैं कि कर्ज की रकम कैसे जमा होगी। उनकी बेटी सविता, कविता, छोटी व बेटा निखिल का रो रोकर बुरा हाल है। खेती लगभग पांच डिस्मिल है। महदेवा गांव की करिश्मा देवी ने कहा कि बेटी की शादी के लिए करीब 60 हजार रुपये कर्ज ली हूं।
वसूली करने वाले एजेंट रोजाना आते हैं। रकम नहीं मिलने पर दिनभर घर के सामने बैठे रहते हैं। गांव की गीता, परमशिला, सीता, अनीता, गुड़िया, शांति, ज्ञानमती व सोनी सहित कई महिलाएं समूह से कर्ज ली हैं।
अधिकांश बेटी की शादी के लिए ही कर्ज ली हैं। इन सभी का कहना है कि वसूली करने वाले एजेंट अनुरोध करने पर बात नहीं सुनते हैं। वे अपनी जीद पर अड़े रहते हैं।
महिलाओं ने कहा कि किस्त समय से जमा करने के लिए हमेशा प्रयास किया जाता है, लेकिन घरेलू जरूरतों को पूरा करने में ही जेब ढीली हो जा रही है। कर्ज लिया गया है तो उसे जमा ही करना पड़ेगा। अपमानित किया जाना ठीक नहीं लगता है।
शांति देवी ने बताया कि आठ समूह से तीन लाख कर्ज लिया गया। महीने में करीब 16000 रुपये किस्त जमा करती हूं। देर होने पर एजेंट प्रताड़ित करते हैं। रीता देवी ने बताया कि पांच समूह से दो लाख कर्ज ली हूं।
महीने का 10500 रुपये किस्त जमा करती हूं। दो महीना पहले किस्त न जमा करने पर एजेंट आए और सिंलिडर लेकर चले गए थे। सुमन ने बताया कि तीन लाख रुपये कर्ज ली हूं। किस्त जमा करने को लेकर हमेशा तनाव बना रहता है।
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