महराजगंज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट की जनपदीय कार्यकारिणी ने प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर बुधवार को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के सामने धरना दिया। शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की।
संगठन के जिलाध्यक्ष डॉ. नवीन श्रीवास्तव ने बताया कि 25 सूत्री मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। धरने की प्रमुख मांगों में 01 अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली, अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का राजकीयकरण, चयन बोर्ड की धारा 12, 18 और 21 की पुनर्स्थापना, एनओसी रहित ऑनलाइन स्थानांतरण व्यवस्था, 05 लाख तक की निशुल्क चिकित्सा सुविधा, सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) का पदनाम बदलकर सहायक प्रवक्ता करने, महिला शिक्षिकाओं के लिए मासिक माहवारी के दौरान दो दिन का विशेष अवकाश शामिल है।
संगठन के प्रदेश मंत्री विजय जायसवाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक इस समय गंभीर संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधक महासभा सरकार पर दबाव डाल रही है कि इन विद्यालयों की ग्रांट समाप्त कर दी जाए, शिक्षकों के वेतन वृद्धि और चयन के अधिकार प्रबंधकों को सौंप दिए जाएं और अंततः इन विद्यालयों को प्रबंधकों के हवाले कर दिया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकार ने पुरानी पेंशन योजना को छीनकर शिक्षकों के भविष्य को असुरक्षित कर दिया है। उन्होंने कहा, “हम तब तक अनवरत संघर्ष करते रहेंगे, जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं हो जाती।
संगठन के उपाध्यक्ष छबीले उपाध्याय ने सरकार पर शिक्षकों की समस्याओं को नजरअंदाज करने और प्रबंधक महासभा के दबाव में काम करने का आरोप लगाया। जिला मंत्री चंदन कुमार ने कहा कि उनकी मांगें जायज हैं और सरकार को इन्हें मानना ही होगा।
इस दौरान कामाख्या जायसवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा, महेंद्र गुप्ता, संतराज यादव, मनोज कुमार, आदित्य चौरसिया, कुमुद, रंजन सिंह, राजीव रंजन, आरबी सिंह, संदीप सिंह मौजूद रहे।