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लाल सड़न से बचाव के लिए बदलनी होगी गन्ने की प्रजाति

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लाल सड़न से बचाव के लिए बदलनी होगी गन्ने की प्रजाति
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महराजगंज। जिले में लाल सड़न (रेड राट) से प्रभावित गन्ने की खेती के विकल्प के रूप में अब जिम्मेदारों ने किसानों को गन्ने की प्रजाति बदलने को कहा है। प्रजाति बदलने से गन्ना किसान जहां पहले की तुलना में थोड़ा कम उत्पादन प्राप्त करेंगे, लेकिन भविष्य के लिए बेहतर रहेगा।
जिले के सिसवा बाजार, घुघली, गड़ौरा व फरेंदा परिषद में इस बार कुल 132 हेक्टेयर गन्ने की फसल लाल सड़न रोग से प्रभावित हुई थी। उत्पादन के लिहाज से सबसे बेहतर मानी जाने वाली प्रजाति 0284 में लगे इस रोग ने किसानों के साथ-साथ विभाग की भी मुश्किलों को बढ़ाया है। विभाग ने भविष्य के दृष्टिगत इस प्रजाति के न इस्तेमाल किए जाने को लेकर किसानों को जागरूक रहने को कहा है। विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि जिस खेत की फसल रेड राट से प्रभावित हुई है, उसमें गन्ने की बुआई न की जाए, बल्कि उसकी जगह धान की बुआई करा दी जाए।
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दूसरे खेत में गन्ने की बुआई की जाए तो प्रजाति के रूप में गन्ने के ऐसे बीज का चयन किया जाए, जिसका उत्पादन 0284 प्रजाति से थोड़ा सा कम हो। ऐसा कर गन्ना किसान जहां बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकेंगे, वहीं अपनी आय को भी बढ़ा सकेंगे। जिला गन्ना अधिकारी जगदीश चंद्र यादव ने बताया कि गन्ने की फसल पर रोग का प्रभाव लगभग दशक भर तक रहता है। ऐसे में भविष्य को देखकर यह जरूरी है कि हम अभी से इस विषय पर गंभीर होकर उनके विकल्प का इस्तेमाल करें।
गन्ने की प्रजाति 0284 की जगह गन्ना किसान 94184, 98014, 8272 व 8279 का इस्तेमाल करने पर बल दें। इन प्रजातियों में फर्क यह है कि 0284 का प्रति हेक्टेयर गन्ने का उत्पादन जहां 1000 से 1100 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, वहीं अन्य प्रजातियों का 950 से 1000 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।
जिले के लगभग 16500 हेक्टेयर गन्ने में से 11000 हेक्टेयर में 0284 गन्ने की फसल बोई जाती थी, जबकि 5500 हेक्टेयर में अन्य प्रजाति। अब किसानों को यह प्रजाति छोड़कर दूसरे प्रजाति पर जोर देना होगा।
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आईपीएल सिसवा के महाप्रबंधक कर्मवीर सिंह ने बताया कि किसानों को गन्ने की फसल की बुआई के दौरान प्रमाणित बीज के प्रयोग पर जोर देना चाहिए। प्रमाणित बीज से अच्छी फसल होने की संभावना बनी रहती है।
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