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Maharajganj News: पानी में डूबी गन्ना की फसल, घट सकती है मिठास

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बाढ़ के जलभराव से गन्ने की फसल को नुकसान। 
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लंबे समय तक जलभराव रहा तो उत्पादन और चीनी परता पर पड़ सकता है असर
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फिलहाल आबादी के चारों तरफ खेतों में बाढ़ का पानी भरा, किसानों को फसल बचाने की चिंता
कुशीनगर। बाढ़ का पानी गांवों से निकलने लगा है लेकिन खेतों में खड़ी गन्ने की फसल अब भी जलभराव का शिकार हैं। कई इलाकों में गन्ने के खेतों में पानी जमा है। इससे किसानों को उत्पादन के साथ-साथ गन्ने की गुणवत्ता कम होने की चिंता सताने लगी है। आशंका है कि जलभराव के कारण उत्पादित गन्ने की मिठास कम हो सकती है।
वहीं गन्ना अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक का कहना है कि अभी केवल कुछ दिनों के जलभराव के आधार पर गन्ने की मिठास कम होने की बात कहना जल्दबाजी होगी। लंबे समय तक पानी जमा रहने पर ही फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।
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गेंदा सिंह गन्ना प्रजनन एवं अनुसंधान संस्थान, सेवरही के वैज्ञानिक डॉ. वाईपी भारती ने बताया कि गन्ने की जड़ों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से फसल प्रभावित हो सकती है। अभी फिलहाल मिठास कम होने की कोई बात नहीं है। अगर बहुत देर तक जलभराव रहता है, तभी गन्ने की गुणवत्ता और मिठास पर प्रभाव पड़ सकता है। गन्ने का मिठास कम होने से चीनी के उत्पादन में कमी आएगी और चीनी मिलों के संचालन में देरी हो सकती है।
खड्डा और तमकुहीराज तहसील क्षेत्रों में गन्ने की अधिक खेती होती है, इन क्षेत्रों में बाढ़ का पानी भरने से गन्ने की फसल डूब गई है, ऐसे में पानी अब धीरे-धीरे खेतों से निकल रहा है, लेकिन इसका असर गन्ने की फसल पर दिखेगा। इसको लेकर किसान चिंतित हैं।
स्पीकअप
गन्ने में काफी लागत लगी है। खेत में पानी भरने से फसल के गुणवत्ता की चिंता बढ़ गई है। पानी जल्द निकल जाए तो फसल के बचने की उम्मीद है लेकिन जलभराव लंबे समय तक रहा तो नुकसान बढ़ सकता है।
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-प्रदीप गौड़, किसान अहिरौलदान
बाढ़ के कारण खेतों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। गन्ने की कटाई और उसे समय पर चीनी मिल तक पहुंचाने की भी चिंता है। खेत में पानी अधिक दिन रहा तो फसल गुणवत्ता खराब होने की आशंका है।
-अरविंद सिंह पटेल, किसान अहिरौलदान
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