जलभराव से बर्बाद हो गई गन्ना, पपीता एवं केले की फसल
सिसवां बाजार (महराजगंज)। विगत माह बारिश के कारण क्षेत्र में जलभराव होने से गन्ना, पपीता एवं केले की खेती बर्बाद हो गई है। जहां इस नुकसान से किसानों की चिंता में इजाफा हुई है वहीं, अब किसानों को सरकार से मदद की दरकार है। क्षेत्र में ज्यादातर किसान गन्ना एवं केले की खेती करते हैं। वहीं कुछ पपीते की खेती भी करते हैं।
जलभराव होने से किसानों की खेती चौपट हो गई है। खेत से पानी हटने के बाद बर्बाद हुई फसल को ठीक करने में किसान जुटे हैं। वहीं, बची हुई फसल में जरूरी दवाओं को छिड़काव कर व्यवस्थित किया जा रहा है। क्षेत्र के किसानों के कहा कि सिर्फ जलभराव से ही नहीं रोग लगने से भी फसल चौपट हुई है। लगी हुई पूंजी कैसे निकलेगी इसे सोचकर किसान परेशान हैं। सबया गांव के रहने वाले रामअवध चौरसिया ने बताया कि 28 एकड़ में केला एवं 60 एकड़ लीज पर लेकर गन्ने की खेती की, लेकिन जलभराव से ज्यादा नुकसान हुआ है।
फसल लगाने में लाखों की रकम खर्च हो गई। लेकिन जलभराव एवं रोग लगने से ज्यादातर फसल बर्बाद हो गई है। जलभराव से चार एकड़ केला व पौने तीन एकड़ गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। सरकार से कुछ मदद मिल जाती तो अच्छा रहता। राजन मद्धेशिया ने बताया कि गुरली व भमौरी फार्म में 10 एकड़ भूमि लीज पर लेकर केले की खेती की है। जलभराव से केले की फसल पूरी तरह से चौपट हो गई। फसल लगाने में खर्च हुई धनराशि निकलना मुश्किल है। बर्बाद हुई फसल के एवज में मुआवजा मिल जाता तो अच्छा रहता। किसानों के उत्थान की बात की जाती है। लेकिन वक्त आने पर किसानों की मदद नहीं होती।
सिसवां कस्बे के श्रीरामजानकी मंदिर रोड निवासी काशी प्रसाद वैश्य का कहना है कि गोनहां में सात एकड़ केला व पपीता लगाया। जिस पर 6 लाख रुपये व्यय हुआ था, लेकिन पूरी फसल बर्बाद हो गई है। अब जरूरी कार्य कैसे होंगे, इसे लेकर परेशानी बढ़ गई है। वहीं, राजेश यादव का कहना है कि बुचियां सबया में दो एकड़ केले की खेती की है। लेकिन खेतों में जलभराव होने से काफी नुकसान हुआ है। कुछ हिस्सा बचा है। लेकिन उससे लागत निकला मुश्किल लग रहा है।
सिसवा ब्लॉक के एडीओ एजी धीरेंद्र सिंह ने बताया कि संबंधित विभाग की ओर से नुकसान का आकलन कर किसानों की हर संभव मदद की जाएगी।