महराजगंज। रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए मिलावटखोर लोगों की सेहत से खेल रहे हैं। मिठाई की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए धंधेबाज मिलावट तेज कर दिए।
गोरखपुर में मिलावटी खोवा पकड़ा गया है। संदेह है कि गोरखपुर की मंडी से महराजगंज जिले में भी मिलावटी खोया खपा दिया गया है।
सूत्रों की माने तो चावल का आटा मिलाकर खोआ बनाया जाता है। यह चावल 10 से 20 रुपये किलो मिल जाता है।
गोरखपुर की मंडी से खोआ में शकरकंद की मिलावट कर मंगाई जा रही है। इसके साथ ही मिल्क पाउडर से खोआ भी खूब बनाया जा रहा है। चिकनाई के लिए पाम ऑयल मिलाते हैं। इसके साथ ही आधा सिंथेटिक दूध और पाउडर दूध मिक्स करके नकली खोआ तैयार होता है।
पनियरा, घुघली, ठूठीबारी, निचलौल, नौतनवा, फरेंदा, बृजमनगंज, सिसवा, परतावल कस्बे में मिलावटी खोआ डंप होने की बात कही जा रही है। मिठाई बनाने के लिए शुद्ध खोआ और शुद्ध छेना मुश्किल से मिलता है। एक कारीगर ने बताया कि एक लीटर शुद्ध दूध जलाने पर उससे अधिकतम 180 से 200 ग्राम तक खोआ मिलता है।
वहीं अगर इससे छेना निकाला जाए तो उसकी मात्रा खोआ से भी 30 ग्राम कम होगी। इस तरह देखे तो एक किलोग्राम खोआ के लिए पांच लीटर शुद्ध दूध चाहिए। 50 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 250 रुपये का दूध लगेगा। पूरा खर्च 350 रुपये प्रति किलो आता है।
इससे बनी मिठाई भी महंगी होगी। खोआ का सबसे अधिक प्रयोग गुलाब जामुन बनाने में होता है। दुकानों पर गुलाब जामुन 260 रुपये से 450 रुपये प्रतिकिलो बिक रहा है।
पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 3000 लीटर रोजाना दूध का उत्पादन होता है। विभागीय योजनाओं से 21 डेयरी का संचालन होता है। शहर में रोजाना दुकानों से घरों तक करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत होती है। इसकी पूर्ति के लिए धंधेबाज व्यवस्था करना शुरू कर दिए हैं।