महराजगंज। रविवार को जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मुख्यमंत्री आरोग्य मेले का आयोजन हुआ। आरोग्य मेले में खुजली, दाद, एलर्जी, अस्थमा और मधुमेह जैसी बीमारियों से पीड़ित मरीज उपचार के लिए पहुंचे। विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और समुचित व्यवस्था न होने से उन्हें असुविधा का सामना करना पड़ा।
गड़ौरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर सुबह 10:45 बजे डॉ. संदीप मरीजों का इलाज कर रहे थे। वहां इलाज के लिए पहुंची विद्यावती ने बताया कि वह एलर्जी की समस्या से परेशान हैं और लंबे समय से उपचार करा रही हैं, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। आरोग्य मेले में भी उन्हें कोई विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है। इसी तरह, शुगर की मरीज शीला देवी ने बताया कि शुगर टेस्ट की समुचित व्यवस्था नहीं थी, जो दवा मिली, उसे लेकर घर जाना पड़ा।
हरपुर तिवारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 11:25 बजे डॉ. रामनिवास प्रजापति मरीजों को देख रहे थे। वहां पहुंचीं सावित्री ने बताया कि खुजली की क्रीम नहीं मिली। कुछ दवा मिली है। वहीं, शुगर के मरीज मनोज ने बताया कि जांच तो की गई, लेकिन शुगर की दवा उपलब्ध नहीं मिली।
कृत पिपरा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 12:37 बजे डॉ. मनोज मिश्रा मरीजों का इलाज कर रहे थे। वहां दाद की समस्या से पीड़ित झीनक को एंटीबायोटिक दवाएं तो दी गईं, लेकिन लगाने के लिए क्रीम नहीं मिली। अस्थमा पीड़ित बलजीत ने बताया कि तेज हवा में सांस फूल रही है। इलाज के लिए वह आरोग्य मेले में पहुंचे, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर न होने से बेहतर ढंग से इलाज नहीं हो सका।
डिप्टी सीएमओ डॉ. केपी सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री आरोग्य मेले में मरीजों के इलाज में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी चिकित्सकों को निर्देश दिया कि अस्पताल में उपलब्ध सभी दवाओं का वितरण बीमारी के अनुसार किया जाए।
संस्थागत प्रसव रजिस्टर की जांच की
उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. केपी सिंह ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घुघली का निरीक्षण किया। वहां अधीक्षक डॉ. अमित विक्रम मौजूद रहे। उन्होंने संस्थागत प्रसव रजिस्टर की जांच की। इसमें मार्च माह में 137 गर्भवतियों का पंजीकरण पाया गया। उन्होंने निर्देश दिया कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की संपूर्ण जांच कराई जाए, जिसमें हिमोग्लोबिन, शुगर, अल्ट्रासाउंड, ब्लड प्रेशर, एचआईवी, वजन और लंबाई की जांच अनिवार्य रूप से हो।