महराजगंज। दोगुने लाभ के चक्कर में तस्कर नेपाल के रास्ते चीन का सेब भारत पहुंचा रहे हैं। यह महराजगंज और गोरखपुर की मंडी तक पहुंच रहा है। चीन और भारतीय सेब में अंतर समझना मुश्किल है। यही वजह है कि भारतीय सेब में आसानी से चीन के सेब को मिला दिया जाता है।
बाजार में चीन के सेब की भरमार है। नेपाल में मिलने वाले चीन के सेब में प्रतिकिलो 40 रुपये का अंतर है। सूत्रों की माने तो भारत-नेपाल की खुली सीमा से चौकसी के बाद भी इन दिनों चाइनीज सेब की बड़ी मात्रा में तस्करी हो रही है। भारत-नेपाल सीमा से सटे जनपद के सीमावर्ती बाजार चाइनीज सेब से पटे हैं। आकार और आकृति में बड़े और आकर्षक दिखने वाले इन सेब की मार्केट में मांग बढ़ी हुई है, जिसका तस्कर फायदा उठा रहे हैं और मुंहमांगा दाम लेकर इस धंधे में लगे हैं।
सीमा पार से निकलकर चाइनीज सेब की खेप जिला मुख्यालय से लेकर गोरखपुर तक पहुंच रही है। बाजारों में ठेले से लेकर बड़ी दुकानों पर इसकी बिक्री हो रही है, लेकिन जिम्मेदार इसके प्रति अनजान बने हैं। बीते 3 फरवरी को 170 पेटी चीन का सेब बरामद हुआ था। पूछताछ में पता चला था कि नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्र में तस्कर सेब डंप करते हैं। फिर मौका मिलते ही बॉर्डर की पगडंडियों के रास्ते भारत लेकर आ जाते हैं।
40 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच मिलता है चीन का सेब : चाइनीज सेब और भारतीय सेब में काफी अंतर है। भारतीय सेब की कीमत जहां 120 से 200 रुपये किलो है, वहीं चीन का सेब नेपाल में 40 से 80 रुपये प्रति किलो के बीच मिल जा रहा है। व्यापारियों को मात्र 40 से 80 रुपये प्रति किलो में तस्कर उपलब्ध करा देते हैं। इसके बाद व्यापारी बाजार में भारतीय सेब के मूल्य पर ही बेचते हैं।
इन रास्तों से हो रही तस्करी : महराजगंज की खुली सीमा नेपाल झुलनीपुर, ठूठीबारी, लक्ष्मीपुर, बरगदवा, सेवतरी, भगवानपुर, सोनौली, खनुवा, हरदीदाली, कोल्हुई सहित विभिन्न नाकों से रोजाना सेब की तस्करी हो रही है। सूत्र बताते हैं कि सेब की तस्करी के लिए पहले सीमा के निकट एक निश्चित गोदाम में इन्हें स्टोर किया जाता है। इसके बाद इन्हें छोटे वाहनों से महानगरों और बाजारों में भेज दिया जाता है।