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Maharajganj News: काॅस्मेटिक सामानों को नेपाली मुद्रा में खरीदते हैं तस्कर

Thu, 30 Nov 2023 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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महराजगंज। काॅस्मेटिक सामानों की तस्करी के खेल का नेटवर्क नेपाल के बड़े शहरों तक फैला है। तस्कर नेपाली करेंसी में सामान खरीदकर भारतीय बाजार में रुपये में बेचते हैं। इसमें आसानी से 15 से 20 रुपये का मुनाफा मिल जाता है।
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फुटकर बाजारों में नेपाल से आया माल आसानी से खप जाता है, और तो और इसकी पहचान आसान नहीं होती है। एक ही कंपनी भारत व नेपाल दोनों जगहों के लिए प्रोडक्ट तैयार करती हैं। नेपाल में उनके उत्पाद का रेट नेपाली मुद्रा में होता है, लेकिन यह सामान जब भारत में बिकता है तो उस पर नेपाली रेट लिखा होता है। यह भारत से ज्यादा होता है।
ग्राहक दाम देखकर दुकानदारों को पैसा देते हैं। सौ रुपये भारतीय नोट का 160 रुपये नेपाली मुद्रा होती है। सूत्र बता रहे हैं कि कॉस्मेटिक सामान को तस्कर धड़ल्ले से भारत पहुंचा रहे हैं।
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सीमा शुल्क में चोरी कर तस्कर न सिर्फ कस्टम विभाग को चूना लगा रहे हैं बल्कि अपनी जेब भी भर रहे हैं। लाखों के कॉस्मेटिक का सामान तस्कर आसानी से सरहद पार कर देते हैं। ठेले व साइकिल पर रखकर सीमावर्ती क्षेत्र में फेरी लगाकर बेचते हैं। दुकानों पर भी आसानी से नेपाल से आया कॉस्मेटिक सामान आसानी से मिल जाता है।
सूत्र बताते हैं कि काॅस्मेटिक सामान नेपाल की ओर से सेवतरी, खनुआ, सुंडी घाट, हरदीडाली, रजिया घाट, बैरिहवा, मुड़िला, चंडीथान, खैराघाट, कुरहवा घाट, जोगियाबारी व भगवानपुर से होकर आता है। प्रत्येक सामान में औसतन 15 से 20 रुपये का मुनाफा होता है।
हमेशा प्रयोग होने वाले सामान को ज्यादातर दुकानदार थोड़ा-थोड़ा कर कई बार भारतीय सीमा में लाकर दुकानों पर बेचते हैं। बताया जाता है कि जो क्रीम नेपाल में 30 से 35 रुपये में मिलता है, वह भारतीय में आने पर 50 से 55 रुपये में बिकता है। अन्य सामानों की भी कमोवेश यही स्थिति है।
नेल पॉलिश से लेकर क्रीम, पाउडर, पेस्ट समेत अन्य सामान आसानी से सरहद पार किए जा रहे हैं। सूत्र के मुताबिक नेपाल से काॅस्मेटिक सामान लाकर सीमावर्ती क्षेत्र में फेरी वाले बेचते हैं। इसके अलावा यहां नकली सामानों की आसानी से खपत हो जाती है। असली जैसे दिखने वाले तमाम शैंपू, टूथपेस्ट, साबुन, मसाला, पाउडर, सौंदर्य प्रसाधन के कई ब्रांड के क्रीम यहां उपलब्ध हैं। इनके डिब्बों पर जहां मूल्य तो ब्रांडेड कंपनियों का लिखा होता है, लेकिन अक्सर इनके नकली होने की आशंका बनी रहती है। तस्कर जहां बिना सीमा शुल्क जमा किए नेपाल से सामान लाकर भारतीय सीमा में बेच देते हैं।
अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार सिंह ने बताया कि तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। अगर ऐसी बात है तो अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।


सीमावर्ती क्षेत्रों के कई रास्तों से सामानों को ले जाते हैं, महिलाएं बनही हैं कैरियर
तस्करी के रास्तों में नौतनवा थाना क्षेत्र के संपतिहां, छपवा, सुंडी, खनुवा, हरदी डाली, कैथवलिया, बरगदही, फरेनिया, श्याम काट, भगवानपुर व सोनौली की दो नंबर गली है। सीमावर्ती क्षेत्र में लगभग एक दर्जन ऐसे रास्ते हैं, जहां से काॅस्मेटिक सामानों की तस्करी होती है। सामान्य तौर पर दिन में नेपाल के बाजारों से आने वाली महिलाएं होती हैं। यह तस्करों के लिए कैरियर के रूप में काम करती हैं। खरीदारी करने के बाद उसे गंतव्य तक पहुंचा देती हैं। कैरियर भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाते हुए पडंडियों के रास्ते पहले इन सामानों को बार्डर एरिया पार कराकर सोनौली, कोल्हुई बाजार, ठूठीबारी, झुलनीपुर आदि एरिया में स्टॉक करते हैं। इसके बाद यहां से इन सामानों को गंतव्य तक भेजा जाता है।
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