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Maharajganj News: भारतीय क्षेत्र से तस्कर नेपाल पहुंचा रहे चीनी, कमा रहे तीन गुना मुनाफा

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सीमावर्ती इलाके में चार दिन में बढ़ा छह रुपये रेट, 46 रुपये की चीनी नेपाल पहुंचते ही 125 से 150 रुपये में बिक रही
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त्योहार के कारण नेपाल में चीनी की मांग बढ़ी
संवाद न्यूज एजेंसी
महराजगंज। भारतीय क्षेत्र से चीनी नेपाल में पहुंचते ही तीन गुने से ज्यादा रेट में बिक रही है। बीते चार दिनों में 40 के भाव से बिकने वाली चीनी अब 46 रुपये प्रति किलो की दर से मिल रही है। यही चीनी सरहद पार होते होते ही 120 से लेकर 150 रुपये प्रति किलो में बिकती है। नेपाल में चीनी की बढ़ती मांग को देखते हुए फायदा उठा रहे हैं।
प्रत्येक दिन पगडंडियों से साइकिल, टेंपों के जरिए नेपाल चीनी पहुंचा दी जाती है। तीन गुने मुनाफे के खेल में तस्करों का नेटवर्क बहुत मजबूत है। क्योंकि तस्करी के सरगना पुलिस के हाथ नहीं लगते हैं। कैरियरों को दबोच कर दायित्व की इतिश्री कर दी जाती है। सूत्रों के अनुसार, दीपावली और छठ पर्व से पहले नेपाल में चीनी की मांग बढ़ने के कारण भारत से तस्करी बढ़ गई है।
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जानकारों की माने तो इस कारण सीमा क्षेत्रों की दुकानों में चीनी की कीमतों में अंतर आ गया है। बॉर्डर पर नेपाली ग्राहकों को लुभाने की कोशिश में उन्हें कम दर पर चीनी बेची जा रही है, जबकि स्थानीय ग्राहकों को नेपाली ग्राहकों की अपेक्षा दो से तीन रुपये अधिक मूल्य चुकाना पड़ रहा है। नेपाली ग्राहकों को चीनी 44 रुपये की मिल रही है, जबकि स्थानीय लोगों से दुकानदार 46 रुपये ले रहे हैं। एक सप्ताह के पहले चीनी का मूल्य 40 रुपये था। बाजार से चीनी नेपाल पहुंच रही है।
नेपाल में दशहरा के बाद बड़े पर्व में दिवाली, भाईदूज और नेपाल के तराई क्षेत्र में छठ पर्व है। ये सभी पर्व नेपाल में बड़े ही धूमधाम से मनाए जाते हैं। इसमें चीनी और फूलों की मांग बढ़ जाती है। नेपाल सरकार ने गेंदा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए भारत से गेंदा फूल के आयात पर रोक लगा दी है। भारत से नेपाल चीनी निर्यात पर बीते वर्ष से रोक के कारण नेपाल में चीनी नहीं मिल रही है।
वहां ग्राहकों को 125 रुपये से लेकर 150 रुपये किलो तक मूल्य चुकाना पड़ रहा है। नेपाल सरकार ने 25 हजार मीट्रिक टन चीनी के आयात के लिए भारत सरकार से अनुरोध किया है। नेपाल में चीनी की कमी होने के कारण तस्करी बड़े पैमाने पर शुरू हो गई है।

अपर पुलिस अधीक्षक आतिश कुमार ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्र में सख्ती रहती है। समय समय पर बरामदगी की जाती है। पुलिस व एसएसबी संयुक्त गश्त कर कड़ी चौकसी बरत रही है।
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सीमा पर नेपाली ग्राहकों को कम दाम पर चीनी
सीमावर्ती सोनौली, भगवानपुर, ठूठीबारी क्षेत्र के दुकानदार नेपाली ग्राहकों को कम दर पर चीनी बेच रहे हैं। ताकि वे अन्य सामान खरीदने भी उनके पास ही आएं। नेपाली ग्राहकों के लिए चीनी कम न पड़े इसलिए स्थानीय ग्राहकों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। भारतीय सीमावर्ती क्षेत्र के बाजार सोनौली, नौतनवा, खनुवा, फरेनिया, भगवानपुर, बरगदवा, परसा मलिक, ठूठीबारी और निचलौल में एक सप्ताह के अंदर छह रुपये किलो मूल्य की बढ़ोतरी हुई है। पहले 40 रुपये में चीनी मिलती थी। अब दुकानदार 46 रुपये ले रहे हैं।
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खुली सीमा का फायदा तस्कर उठा रहे
भारत सरकार द्वारा चीनी नेपाल निर्यात होने वाले चीनी पर रोक लगाई गई है, इसके बावजूद दो पहिया व चार पहिया वाहनों से चीनी की बोरियों की तस्करी की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि भारत-नेपाल की खुली सीमा का फायदा तस्कर उठा रहे हैं। इस समय इस सीमा पर चीनी तस्करों की बहार है। साइकिल और मोटरसाइकिल तो छोड़िए पिकअप गाड़ियों में भरकर भारत से नेपाल चीनी की बोरियां आराम से पहुंचा दी जा रही हैं।
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आबादी एक लाख, खपत प्रतिदिन 200 टन
सीमावर्ती बाजार नेपाल से काफी करीब में है। सोनौली बाजार, भगवानपुर, खनुवा, बरगदवा, ठूठीबारी नोमेंस लैंड से सटा एक छोटा सा गांव और नगर पंचायत है। इन सभी गांवों और पंचायत की आबादी लगभग एक लाख है। जहां करीब 20 दुकानें हैं। दुकान की आड़ में चीनी गोदाम में डंप किया जाता है।
सूत्र की माने तो सीमा पर अधिकतर घरों के अंदर लोगों ने बड़े गोदाम बना रखे हैं, जहां पर पहले सामानों को स्टोर किया जाता है और फिर कैरियरों के माध्यम से इसे नेपाल पहुंचा दिया जाता है। हालांकि तस्करी के धंधे में कुछ सफेदपोश लोग अपने रुपये लगाकर प्रतिबंधित सामानों को खरीदते हैं और यहां के लोगों को कैरियर बनाकर उनसे तस्करी कराते हैं।
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प्रतिबंध लगने का फायदा उठा रहे तस्कर
भारत से नेपाल निर्यात होने वाले चीनी पर रोक लगा दी है। देश में चीनी की भरपूर उपलब्धता होने और चीनी के दाम स्थिर रखने के लिए भारत सरकार ने यह फैसला लिया था, लेकिन सरकार का यह फैसला तस्करों के लिए मुनाफे का सौदा हो गया। नेपाल से सटे निचलौल, झुलनीपुर, ठूठीबारी, चटिया, माधव नगर, लालपुर, बैठवलिया, रेंगहिया, बहुवार, इटहिया, लक्ष्मीपुर, शितलापुर, बरगदवा, भगवानपुर, परसामलिक, श्याम काट, सोनौली, खनुवा, हरदी डाली जैसे दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां पर तस्करी करते हैं।
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