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Maharajganj News: चीनी के अखरोट और कनाडा के मटर की तस्करी से मालामाल हो रहे धंधेबाज

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नेपाल में 190 रुपये किलो बिकने वाला अखरोट भारत में बिकता है 400 रुपये प्रति किलो की दर से
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कनाडा का मटर नेपाल में बिकता है 20 रुपये प्रति किलो, भारत में 60 रुपये में होती है बिक्री
महराजगंज/खनुआ। नेपाल सीमा से भारत में इनदिनों चीनी अखरोट व कनाडियन मटर की तस्करी से धंधेबाज काली कमाई कर रहे हैं। नेपाल से भारत में इन उत्पादों को भेजकर धंधेबाज चीन के अखरोट पर दो गुना और कनाडा के मटर पर तीन गुना तक कमाई कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, भारतीय मंडियों में स्थानीय किसानों की फसल को तवज्जो मिले इसके लिए आयातित फसलों पर कस्टम शुल्क का प्रावधान है। लेकिन भारत नेपाल की अंतरराष्ट्रीय सीमा से विभिन्न फसलों व उत्पादों की तस्करी होती रहती है। कभी ब्राजील का मक्का और चीन का लहसुन तस्करों की कमाई का जरिया था। इसकी आवक नेपाल में घटी तो अब मटर व अखरोट की तस्करी से धंधेबाज मालामाल हो रहे हैं।
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चीन के अखरोट और कनाडा के मटर की तस्करी करके धंधेबाज मोटी कमाई कर रहे हैं। 190 रुपये (भारतीय) किलो की दर से चीन का अखरोट पहले नेपाल पहुंचाया जाता है। भारतीय सीमा में प्रवेश करते ही इसकी कीमत 400 रुपये तक हो जाती है। इस तरह एक किलो पर तस्कर 210 रुपये तक कमा लेते हैं। वहीं कनाडा का मटर 20 से 25 रुपये (भारतीय) किलो के थोक भाव पर नेपाल की मंडियों में बिकता है। यही मटर भारत में लाने के बाद 60 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। मौजूदा समय में इन्हीं दोनों उत्पादों की बदौलत तस्कर चांदी काट रहे हैं और भारतीय कस्टम को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सोनौली सीमा पर कस्टम, पुलिस व एसएसबी ने बीते तीन माह में 89.12 क्विंटल अखरोट बरामद कर किया है। जब बरामद होने वाले अखरोट का वजन 100 क्विंटल के लगभग है तो कितनी मात्रा में चाइनीज अखरोट भारतीय मंडियों में सकुशल पहुंच चुका होगा इसका आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है।
कनाडा से आ रही पीली मटर भैरहवां (नेपाल) की मंडियों में 18 से 20 रुपये किलो की दर से बिक रही है लेकिन यही सीमा पार करने पर भारतीय मंडियों में 60 रुपये किलो के भाव पर बिक रही है। सूत्रों की माने तो नेपाल से प्रतिदिन हरदीडाली, कैथवलिया, सुंडी, बरगदवा की पगडंडियों से 70 से 80 क्विंटल कनाडा का मटर तो 100 क्विंटल से अधिक अखरोट पहुंच रहा है। पगडंडियों के रास्ते इसे लाकर भारतीय क्षेत्र के गोदाम में पहले डंप किया जाता है फिर पिकअप के जरिये भारतीय मंडियों तक पहुंचाया जाता है।
30 फीसदी कस्टम शुल्क की हो रही चोरी
विदेश से आने वाली प्रत्येक वस्तु पर कस्टम शुल्क वसूल किया जाता है। बॉर्डर से आ रहे कनाडा के मटर, ब्राजील का मक्का, चीन का लहसुन व अखरोट पर 30 फीसदी कस्टम शुल्क के भुगतान करने का नियम है। जब इन उत्पादों को पगडंडियों के रास्ते या छिपाकर सीमा पार करा दिया जाता है तो यह राजस्व कस्टम विभाग को नहीं मिलता। इससे तस्करों की लागत कम होती है और वह दाम इसकी बिक्री कर लेते हैं। साथ ही भारतीय कारोबारी भी मुनाफे की लालच में सस्ते सामान को हाथों-हाथ खरीद लेते हैं।
नेपाल से आने वाले खाली टैंकर व ट्रक के सहारे पहुंचा रहे खेप
तस्करों का नया ट्रेंड इन दिनों नेपाल से भारतीय क्षेत्र में आने वाले टैंकर व ट्रक हैं। खाली टैंकर या ट्रक में अखरोट व मटर लोड करा दिया जाता जो आसानी से बिना कस्टम शुल्क दिये भारतीय सीमा तक पहुंच जाता। कस्टम सूत्रों की माने तो सामान या आयल लोड करके नेपाल जाने वाले वाहनों की इंट्री जाते समय हो जाती। लौटते समय इन वाहनों को खाली मानकर विशेष पड़ताल नहीं होती जिसका लाभ यह होता कि उक्त सामग्री बिना कस्टम की नजर में आए भारतीय क्षेत्र तक पहुंच जाती और तस्करों का नेटवर्क अच्छी कमाई कर लेता। पिछले दिनों काठमांडू से लौट रहे ट्रक के गुप्त केबिन से 2570 किलो अखरोट बरामद किया जा चुका है। मामले में ट्रक चालक हरियाणा निवासी साहिब गिरफ्तार किया जा चुका है।
अखरोट तस्करी खबर में दो केस
केस एक-
28 अप्रैल 2026 को स्तंभ संख्या 517/2 के निकट एसएसबी और पुलिस की संयुक्त टीम ने कंटेनर ट्रक के गुप्त केबिन में छिपाकर रखी 103 बोरी विदेशी अखरोट बरामद की। अखरोट का कुल वजन 2,570 किलो था। ट्रक काठमांडू से दिल्ली जा रहा था। कस्टम ने तय शुल्क के साथ जुर्माना वसूला।

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केस 2-
एक जुलाई 2026 को एसएसबी 22वीं वाहिनी ने सीमा स्तंभ 517/1 के पास कुछ महिलाओं को बोरियों को लाते देखा। टीम पास पहुंची तो महिलाएं बोरियां छोड़कर नेपाल की तरफ भाग निकली।33 बोरी अखरोट जब्त किया। प्रत्येक बोरी में 10-10 किलो अखरोट था जिसका कुल वजन 330 किलो पाया गया।
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वर्जन
नेपाल की तरफ से आने वाले प्रत्येक वाहन की तलाशी अच्छी तरह से लेने के बाद ही निकलने दिया जाता है। पुलिस व एसएसबी से समन्वय बनाकर पगडंडियों से होने वाली तस्करी पर भी नकेल कसी जा रही है। कस्टम शुल्क चुकाए बिना अगर कोई सामग्री भारतीय क्षेत्र में सस्ते में बेची जा रही है तो कोई भी हमें सूचित कर सकता है। हम नाम व पता गुप्त रखेंगे।
-सुधीर त्यागी, असिस्टेंट कमिश्नर, कस्टम सोनौली, महराजगंज।
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