महराजगंज। केएमसी मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विशेषज्ञ की ओपीडी में आने वाले बच्चों में चिड़चिड़ापन की समस्या मिल रही है। जांच में पता चला कि ऑनलाइन गेम की वजह से बच्चों की गर्दन में दर्द के साथ स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ रहा है। अगर आपके बच्चे के स्वभाव में एकाएक बदलाव आ रहा है और वह चिड़चिड़ा हो रहा है तो आपको ध्यान देने की जरूरत है।
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शशांक ने बताया कि ऑनलाइन गेमिंग बच्चों को आक्रामक बना रही है। साथ ही गेम खेलने के दौरान निकलने वाला डोपामिन हारमोन बच्चों को ऑनलाइन गेमिंग का आदी बना रहा है। ऐसे में आपके बच्चे को सही काउंसिलिंग व आपके समय की आवश्यकता है। ऐसा न होने पर बच्चा कोई भी गलत कदम उठा सकता है। रोजाना ओपीडी में ऐसे 10 से 15 बच्चे आ रहे हैं।
मनोचिकित्सक डॉ. अखिलेश दास का कहना है कि पिछले तीन से चार सालों में ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ी है जो जिद्दी व चिड़चिड़ेपन का शिकार हो रहे हैं। इन दिनों अभिभावकों की भी जागरूकता बढ़ी है और वे अपने बच्चों की काउंसिलिंग कराने पहुंच रहे हैं। गेमिंग की आदत छुड़ाने के लिए बच्चों और युवाओं के लिए परिवार को समय देना होगा। उसकी दिनचर्या को व्यस्त रखना होगा। दोस्तों के साथ समय बिताकर भी इस आदत से बाहर निकला जा सकता है। खेलकूद व अन्य गतिविधियों में शामिल होना चाहिए। जो लती हो गए हैं, उन्हें मनोचिकित्सक को दिखाना चाहिए।
फिजियोथेरेपी अनुभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. डीके कुशवाहा ने बताया कि प्रत्येक दिन चार से पांच बच्चे आ रहे हैं। मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से टेक्स्ट नेक सिंड्रोम की शिकायत तेजी से बढ़ रही है। मोबाइल पर घंटों व्यस्त रहने के कारण गर्दन की सही और वास्तविक मुद्रा बदल रही है। इससे गर्दन में एक से डेढ़ इंच तक झुकाव की शिकायत सामने आ रही है। मोबाइल या कंप्यूटर पर काम करने के लिए टेबल कुर्सी पर बैठकर काम करें। 45 मिनट तक मोबाइल पर काम करने के बाद पांच मिनट के लिए गर्दन की एक्सरसाइज करें।