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आयुष्मान योग में भगवान शिव की होगी पूजा

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पंचमुखी शिवधाम मंदिर। - फोटो : MAHARAJGANJ
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आयुष्मान योग में शिव की होगी पूजा
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महराजगंज। भगवान शिव का प्रिय माह सावन 25 जुलाई को आयुष्मान और सौभाग्य योग में शुरू होगा। यह योग श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायक होंगे।
जिला मुख्यालय से करीब 35 और निचलौल शहर से 7 किसी दूर भारत-नेपाल सीमा से सटे पंचमुखी शिव मंदिर इटहिया सहित अन्य शिवालयों में सावन के पहले सोमवार को आयोजित होने वाले अभिषेक एवं अनुष्ठान के लिए तैयार शुरू हो गई है। सनातन धर्म में सावन का विशेष महत्व है। यह पावन महीना भगवान शिव को समर्पित है। दूध और गंगाजल से महादेव का अभिषेक करते हैं। महाशिव पुराण और रुद्री का भी पाठ करते हैं। पंडित पंकज दत्त पांडेय ने कहा कि इस वर्ष सावन माह का शुभारंभ आयुष्मान योग में हो रहा है। पवित्र सावन माह में चार सोमवार और दो प्रदोष पड़ेंगे। पूजा अनुष्ठान के लिए कई योग होंगे। उन्होंने बताया कि शिव के भक्तों के लिए सावन के पहला सोमवार 26, दूसरा सोमवार 2 अगस्त, तीसरा सोमवार 9 अगस्त, चौथा सोमवार 16 अगस्त को रहेगा। शिवरात्रि 6 और नागपंचमी 13 अगस्त को पड़ेगा।
पंचमुखी शिवधाम मंदिर समिति के अध्यक्ष उपजिलाधिकारी प्रमोद कुमार ने कहा कि इटहिया में मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। जबकि मंदिर में कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए अभिषेक पूजन किया जाएगा।
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नंदिनी गाय ने झाड़ियों के बीच चढ़ाया दूध
निचलौल (महराजगंज)। इटहिया का शिव मंदिर मिनी बाबाधाम के नाम से विख्यात है। यहां दर्शन के लिए नेपाल, बिहार समेत अन्य स्थानों से लोग आते हैं। पंचमुखी शिवलिंग के इतिहास के संबंध में मंदिर के मुख्य पुजारी ध्यान गिरी बताते हैं कि इस पंचमुखी शिवलिंग के प्रादुर्भाव की कहानी निचलौल स्टेट के राजा बृषभसेन से जुड़ी हैं। राजा बृषभसेन प्रतापी प्रजावत्सल न्याय प्रिय राजा थे। वह भगवान शंकर के अनन्य भक्त थे। उनके गोशाला में एक नंदिनी नाम की गाय थी। राजा सुबह-शाम उस गाय का दर्शन कर उसके दूध का सेवन करते थे। उस समय इटहिया सहित यह समूचा क्षेत्र घने जंगलों से घिरा था। नंदिनी गाय उसी जंगल में घास चरती थी। कुछ दिनों बाद नंदिनी गाय ने दूध देना बंद कर अपना दुध जंगल के घनी झाड़ियों में जमीन पर चढ़ाने लगी।
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वर्ष 1968 में बना था शिव मंदिर
राजा बृषभसेन की मृत्यु के बाद उनके पुत्र रत्नसेन निचलौल के राजा हुए तथा पिता की तरह पत्नी स्वर्ण रेखा के साथ प्रतिदिन पंचमुखी शिवलिंग की पूजा-अर्चना करते थे। डुमरी निवासी पंडित अनिरुद्ध तिवारी व मुन्ना गिरी बताते हैं कि जिस आम के जड़ से पंचमुखी भगवान शिव का प्रादुर्भाव हुआ है, वह अपने आप में एक अनोखा वृक्ष था। बुजुर्गों के अनुसार एक बार एक बंदर उस आम के पेड़ पर चढ़ गया। बहुत प्रयास के बाद भी नीचे नहीं उतर सका। भूख-प्यास से उसकी मृत्यु हो गई। जहां बंदर मरा था, वहां हनुमान मंदिर बनाया गया है। आम का वृक्ष गिर जाने के बाद पंचमुखी शिवलिंग पर गड़ौरा निवासी स्वर्गीय चंद्रशेखर मिश्र ने 1968-69 में मंदिर का निर्माण कराया।
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