निचलौल। ब्लॉक क्षेत्र के सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोतहा गांव में मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर ग्रामीण धरना-प्रदर्शन पर बैठे हैं। वहीं प्रदर्शन के दूसरे दिन बुधवार को एक निजी इंटरमीडिएट काॅलेज के बच्चे पढ़ाई छोड़कर ग्रामीणों के समर्थन में पूरे दिन धरना प्रदर्शन पर बैठे रहे।
बुधवार को उच्चाधिकारियों के निर्देश पर धरना स्थल पर पहुंचे राजस्व निरीक्षक के आश्वासन के बाद भी ग्रामीण अपने मांगों पर अड़े रहे। सोहगीबरवा गांव के बाजार स्थित एक भवन पर धरना प्रदर्शन पर बैठे परशुराम यादव, रामपति पाल, सुखल चौधरी, अयोध्या दास, ओमप्रकाश कुशवाहा, शिब्बन यादव, भूपेंद्र यादव आदि ग्रामीणों ने कहा कि निचलौल ब्लॉक क्षेत्र के तीन गांव सोहगीबरवा, शिकारपुर और भोतहा के साथ ही इसके करीब आठ टोले पर निवास करने वाले लगभग 20 हजार आबादी निवास करती है।
तमाम सरकारी योजनाएं संचालित होने के बाद भी यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से अभी तक वंचित हैं। क्योंकि लोगों के लिए बेहतर सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा सहित अन्य सुविधाएं नदारद हैं। लोगों ने नाराजगी जताते हुए राजनीतिक दलों के जिम्मेदारों को भी खूब कोसा।
लोगों ने कहा कि यहां के लोगों से वोट लेने के लिए जनप्रतिनिधि आते हैं। उसके बाद उनकी समस्याओं के समाधान कराने का आश्वासन देकर वोट लेने के बाद गायब हो जाते हैं। उसके बाद वह लोग समस्याओं को समाधान के लिए घने जंगल और नारायणी नदी पारकर दौड़ लगाते रह जाते हैं, लेकिन उनकी कोई सुनने के लिए तैयार नहीं होता है।
आस्था इंटरमीडिएट काॅलेज शिकारपुर के प्रधानाचार्य शुभम श्रीवास्तव ने कहा कि यह समस्या केवल लोगों के लिए ही नहीं है। बल्कि यहां रहने वाले बच्चे, बुजुर्ग, महिला सबके लिए है। राजस्व निरीक्षक राजेश सिंह ने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देश पर वह धरना समाप्त कराने के लिए पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों के जिद के आगे उनकी एक न चली।