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नेपाल से भटक कर आए गैंडे के पद चिह्न दिखे

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नेपाल से भटक कर आए गैंडे के पद चिह्न दिखे
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वन विभाग की टीम उसका पता लगाने में जुटी
अमर उजाला ब्यूरो
महराजगंज। नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से गैंडों के भटक कर आने का सिलसिला जारी है। एक बार फिर नेपाल के जंगल से भटका एक और गैंडा गंडक नदी के रास्ते वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व क्षेत्र में आ गया। बुधवार की सुबह में उस गैंडे के पद चिह्न सोहगीबरवा क्षेत्र के सीमावर्ती पिपरासी व हरिहरपुर के दियारा में देखे गए।
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फिलहाल सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के पिपरासी हरिहरपुर के दियारा में गैंडा के डेरा डालने की संभावना जताई जा रही है। इस क्षेत्र से वाल्मीकि टाइगर रिजर्व एक से दो किलोमीटर के दायरे में है। उस गैंडे का रुख बीटीआर क्षेत्र की ओर है। वन विभाग के कर्मियों का मानना है कि अगर कोई छेड़छाड़ नहीं हुआ तो वह गैंडा वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के वाल्मीकि नगर और मदनपुर वन क्षेत्र के सीमावर्ती क्षेत्र में पहुंचकर अधिवास बना लेगा। उस गैंडे की सूचना पर सोहगीबरवा वन जीव प्रभाग व वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के अधिकारी खोजबीन व निगरानी करने में जुट गए हैं। बुधवार को दोनों सीमाई क्षेत्रों के वनकर्मियों की टीम के सदस्यों ने सोहगीबरवा के पिपरासी व हरिहरपुर के दियारा में पहुंचकर गैंडे की खोजबीन की। हालांकि काफी दूरी तक गन्ने के खेत और जगह-जगह जल जमाव के कारण अब तक गैंडों के संबंध में कोई ठोस जानकारी नहीं मिल पाई है। बीटीआर प्रमंडल दो के डीएफओ गौरव ओझा ने बताया कि बीटीआर और उत्तर प्रदेश के सोहगीबरवा वन क्षेत्र तथा दियारा में करीब एक वर्ष पहले से भी एक गैंडा मादा दोनों सीमावर्ती वन क्षेत्रों में डेरा डालकर चहलकदमी करते कई बार देखे गए हैं। वन कर्मियों की टीम को उस गैंडे के पद चिह्न दिखे हैं। वहीं सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग के शिवपुर यूनिट के रेंजर उमाशंकर लाल ने बताया कि कंपार्टमेंट नंबर 2 के 54 नंबर बीट सिरला व वाल्मीकि टाइगर प्रोजेक्ट के बीट संख्या 22 की सीमा पर टीम निगरानी कर रही है।
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