महराजगंज। सीमावर्ती क्षेत्रों में जीएसटी बिल में हेराफेरी कर करोड़ों का माल डंप कर अवैध धंधेबाज मालामाल हो रहे हैैं। यह खेल लंबे समय से चल रहा है। बीते साल कपड़े का एक अवैध गोदाम पकड़ा गया था। यहां से करोड़ों के कपड़े बगैर जीएसटी बिल के बरामद हुए थे।
शुक्रवार की रात तीन गोदाम सील किए गए हैं। गोदाम सील होने के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया है। हालांकि गोदाम न खुलने के कारण यह पता नहीं चल सका कि कितने का माल डंप है।
सूत्रों की माने तो तस्करों ने सीमावर्ती गांवों और नगर में अवैध गोदाम बना रखे हैं। यह सरहद से बिल्कुल सटे खाली मकान, दुकान में बनाया जाता है। स्थानीय लोगों को इन जगहों को गोदाम ठिकाना बनाने के लिए महीनेभर में मोटी रकम दी जा जाती है। इतना ही नहीं तस्कर इस खेल को इतना साफ तरीके से करते हैं कि इसकी भनक पुलिस को नहीं लगती या कोई खुलकर बोलने के लिए तैयार नहीं होता है।
नगर के ही कुछ प्रभावशाली या वर्चस्व रखने वाले को भी कुछ हिस्सा दिया जाता है, ताकि इस अवैध धंधे में कोई रुकावट न आए। इसके बाद अवैध गोदाम से तस्करी का यह खेल धड़ल्ले से चलता है। चंदन की लकड़ी भी अवैध गोदाम से बरामद हो चुकी है। शनिवार को सील गोदाम खुले नहीं है।
क्योंकि इसके मालिक मौके पर नहीं पहुंचे। इन गोदामों में ब्रान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र में ब्रान नेपाल भेजने का धंधा तेजी से चल रहा है।
बाइक से माल पहुंच जाता है नेपाल : नगर पंचायत सोनौली, नौतनवा, बरगदवा और ठूठीबारी में बने अवैध गोदाम पकड़ से दूर नजर आ रहे हैं। वहीं ई-रिक्शा से दर्जनों गोदामों में पहले माल डंप किया जाता है। फिर तस्करी में संलिप्त बाइकर के माध्यम से नेपाल भेज दिया जाता है। सीमावर्ती नगर में तस्करों ने कई गोदाम ले रखा है, जिनमें दाल, चीनी, पेयपदार्थ, कपड़ा, मोटरपार्टस, इलेक्ट्रिक सामान डंप किए जाते हैं।
इन क्षेत्रों का अधिक होता प्रयोग : तस्करों के लिए पगडंडी मुफीद साबित होती है। इसमें सबसे पहले स्थान पर आता है कस्बे का चर्चित काॅलोनी प्रेम नगर, वहीं इसके बाद दूसरे नंबर पर एक स्कूल के बगल में पगडंडी, जबकि तीसरे और सबसे महत्वपूर्ण मार्ग की बात करें तो वह है श्यामकाट बाग जो नेपाल सीमा का 0 किमी क्षेत्र पड़ता है।