निचलौल। मैरी गांव स्थित जिला गोसदन मधवलिया में बृहस्पतिवार को डीएम अनुनय झा, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी और आईजीएफआरआई के कृषि वैज्ञानिक सहित अन्य जिम्मेदारों के साथ पहुंचे। जहां पर उन्होंने गोसदन का निरीक्षण किया। इसके बाद गोसदन को स्वावलंबी बनाने और गोवंशीय पशुओं को हरा चारा उपलब्ध कराने के लिए बैठक कर तमाम बिंदुओं पर चर्चा की। इस दौरान गोसदन में भारतीय चारागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान बनाने के लिए मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को निर्देशित भी किया।
डीएम अनुनय झा ने टीम के साथ सबसे पहले जिला गोसदन मधवलिया का निरीक्षक किया। फिर गोसेवकों से गोवंशीय पशुओं की जानकारी ली। इसके बाद भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों से गोसदन में चारा उत्पादन और चारा बीज के शोध को लेकर गहनता से चर्चा की। उसके बाद मुख्य पशु चिकित्साधिकारी को अनुसंधान केंद्र की स्थापना के लिए जल्द प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजने के लिए निर्देशित किया।
वहीं चारा उत्पादन के लिए आवश्यक भूमि को तैयार करने के लिए भूमि संरक्षण अधिकारी को डीपीआर भेजने के लिए कहा। जबकि जल्द चारा उत्पादन के लिए भूमि की जुताई करने के लिए कृषि विभाग को भी निर्देशित किया। आगे इन्होंने अन्य जिम्मेदारों को सख्त निर्देश देते हुए कहा की सभी लोग आवश्यक कार्य को मार्च के अंत तक पूरा कर ले।
बैठक में कृषि वैज्ञानिक डॉ. अवनींद्र कुमार सिंह ने बताया कि शुरुआती दौर में गोसदन में एमपी चरी, गिनी घास, नेपियर हाइब्रिड, दशरथ सहित अन्य बहुवर्षीय घास का उत्पादन लगभग 35 एकड़ में किया जाएगा। शासन की ओर से स्वीकृत होने के बाद यहां पर चारा अनुसंधान केंद्र की भी स्थापना की जाएगी। जो पौष्टिक चारे के उत्पादन के लिए शोध का कार्य करेगी। इसके लिए डिप्टी सीवीओ निचलौल और जिला कृषि अधिकारी को प्रशिक्षण के लिए भारतीय चरागाह एवं चारा अनुसंधान संस्थान झांसी भेजा जाएगा।
इस दौरान मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. यूएन सिंह, डॉ. एसके सिंह, उपनिदेशक कृषि रामशिष्ट, जिला कृषि अधिकारी वीरेंद्र कुमार, एसडीएम मुकेश कुमार सिंह, बीडीओ शमा सिंह मौजूद रहे।