महराजगंज। प्रदेश में जिम कार्बेट कहे जाने वाले सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग के जंगली पशुओं की सुरक्षा के इंतजाम मुकम्मल हो चुके हैं। 15 करोड़ रुपये की लागत से मधवलिया रेंज में वन विभाग का लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर लगभग बनकर तैयार हो चुका है। कुछ काम शेष हैं, जिन्हें कार्यदायी संस्था इस माह पूरा कराने में जुटी है, जिससे नए वित्तीय सत्र में यह वन विभाग को हैंडओवर किया जा सके।
सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग में लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर अमूमन तेंदुए के नाम से है लेकिन यहां सभी जंगली पशुओं के रेस्क्यू की सहूलियत मिलेगी। यहां गंभीर रोग से पीड़ित व घायल जानवरों के उपचार की न सिर्फ समुचित व्यवस्था होगी, बल्कि जंगली पशुओं का पोस्टमार्टम कराकर विभाग मौत का कारण जान सकेगा।
अबतक इसके लिए विभाग को गोरखपुर या लखनऊ जाना पड़ता था। इस सहूलियत के सहारे वन विभाग जंगली जंतुओं को न सिर्फ सुरक्षित रख सकेगा वरन मानव व जंगली जानवरों के बीच का संघर्ष रोकने में भी अहम भूमिका निर्वहन करेगा।
नियंत्रण व मानिटरिंग व्यवस्था के अभाव के चलते अबतक तेंदुए ही नहीं अन्य जंगली जंतु भी आबादी के तरफ रुख करते रहे हैं जो न सिर्फ जंगल से सटे ग्राम पंचायतों की बड़ी समस्या है, बल्कि इन वन्य जीवों की सुरक्षा पर भी खतरा रहता है। अब इसपर अंकुश लगेगा।
वित्तीय सत्र 2021-22 में मिली स्वीकृति
सोहगीबरवां के मधवलिया रेंज में पांच हेक्टेयर में लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर बनाने की स्वीकृति वित्तीय सत्र 2021-22 में मिली और पहली किस्त चार करोड़ रुपये जारी कर काम सीएनडीएस को सुपुर्द किया गया। वित्तीय सत्र 2025-26 तक यहां वाइल्ड लाइफ अस्पताल, मेडिकल सेंटर, क्वारंटीन सेंटर, चिकित्सक कक्ष, स्टाफ रूम, ऑपरेशन थियेटर, एक्सक्यजर ब्लॉक, किचेन, पोस्टमार्टम हाउस, वन्य जीव शव दान गृह का निर्माण पूरा हो चुका है।
यह काम है बाकी
मधवलिया में बनने वाले रेस्क्यू सेंटर तक जाने के लिए मुख्य मार्ग से सेंटर तक जाने वाली पक्की सड़क करीब 5 किमी व सभी भवनों में वायरिंग व बिजली कनेक्शन देने के कार्य शेष हैं जिसके लिए अतिरिक्त बजट डीएफओ ने डीएम संतोष कुमार शर्मा के निर्देश पर शासन को प्रेषित किया है जिसका कार्य होली बाद शुरू हो जाएगा। कार्यदायी संस्था के एई ने बताया कि मार्च समाप्ति तक सभी कार्य पूर्ण करा लिए जाएंगे।
तीन प्रभागों से जुड़ती सीमा
सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग 452 वर्ग किमी परिधि में है। सेंक्चुरी बिहार के वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व व नेपाल के चितवन नेशनल पार्क के साथ नेचुरल कॉरिडोर की तरह है। इनकी सीमाएं आपस में जुड़ी होने के कारण यहां अक्सर नेपाल से गैंडे व बिहार से बाघों की आवाजाही बनी रहती। 2025 सर्वे के मुताबिक सोहगीबरवा वन्य जीव प्रभाग में तेंदुओं की संख्या 67 हैं। चीतल 2004, सांभर 469, नीलगाय 2494, जंगली सुअर 3803, बंदर 7586 , लंगूर 4916 , सियार 1285, जंगली बिल्ली 113, मगरमच्छ 166, काकड़ 416, खरगोश 573, वनगाय 680 की संख्या है।
11 वर्ष में 10 लैपर्ड बने काल के ग्रास
वन विभाग के अभिलेखों के मुताबिक मौजूदा समय में 67 लैपर्ड सोहगीबरवां में हैं। 2015 से अबतक 11 वर्ष में 10 तेंदुए काल का ग्रास बने। 10 साल में आठ तेदुओं की मौत हो चुकी है। इसमें चार की मौत 2015 में हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में डोमा जंगल में एक तेदुएं की मौत, मधवलियां गोसदन में संदिग्ध हालात में मौत हुई। अप्रैल 2015 में पकड़ी जंगल में तेंदुए की संदेहास्पद मौत, 10 जून 2015 को लक्ष्मीपुर रेंज में तो 29 नवंबर 2015 को मधवलिया रेंज के दुधई बीट में तेंदुए की मौत हुई। दिसंबर 2015 को चौक रेंज के नक्शा बक्शा गांव में तेंदुए की मृत्यु तो मार्च 2018 को चौक रेंज के नाथनगर में तेंदुआ मरा। दिसंबर 2018 को उत्तरी चौक रेंज में तेंदुए की मौत का जिक्र है।
मधवलिया में लैपर्ड रेस्क्यू सेंटर से वन जीवों की सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। घायल व रोगग्रस्त जानवरों को उपचार के जरिये बचाया जा सकेगा। मृत जीवों के पोस्टमार्टम की सहूलियत यहीं मिलेगी। रेस्क्यू सेंटर मानव व वन्य जीव संघर्ष रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वहन करेगा। सड़क व बिजली कार्य इस माह पूर्ण करा लिया जाएगा।
-निरंजन सुर्वे, डीएफओ, सोहगीबरवां वन्य जीव प्रभाग