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Maharajganj News: बॉर्डर पर जाम से मिली राहत, समस्या जस की तस

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सोनौली बॉर्डर पर शुक्रवार को ट्रकों की लगी कतार।  
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12 किलोमीटर तक लगा ट्रकों का जाम, करीब दो हजार ट्रक फंसे
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प्रतिदिन औसतन 400 वाहन नेपाल सीमा में करते हैं प्रवेश
एमआरपी अनिवार्यता में आंशिक रूप से छूट मिलने से मिली राहत
सोनौली। नेपाल सीमा स्थित सोनौली बॉर्डर पर बीते एक सप्ताह से मालवाहक वाहनों के लगे जाम से हल्की राहत मिली है। बृहस्पतिवार को 14 किमी जाम की तुलना में शुक्रवार को दो किमी जाम घट गया। सीमा पर लगे इस जाम में दो हजार से अधिक ट्रक फंसने से चालक, व्यापारी और स्थानीय लोग भी परेशान हैं। हालांकि यात्री वाहनों की दूसरे लेन से सामान्य रूप से आवाजाही जारी है।
मालवाहक वाहनों की समस्या को देखते हुए नेपाल भंसार विभाग की ओर से एमआरपी व्यवस्था में आंशिक सहूलियत दी गई है। इस राहत का असर शुक्रवार को दिखा और जाम में खड़े कतार में ट्रकों की संख्या में कमी दर्ज की गई। सामान्य तौर पर नेपाल में एक दिन में औसतन 400 वाहन नेपाल में प्रवेश करते हैं। शुक्रवार को अधिक ट्रकों के प्रवेश करने के कारण यह राहत मिली है। हालांकि जाम में फंसे ट्रक चालकों, माल मंगाने और भेजने वाले व्यापारियों और स्थानीय लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
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दिल्ली, कोलकाता, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, पंजाब और कानपुर समेत कई राज्यों से दैनिक उपयोग के सामान, औद्योगिक मशीनरी, टाइल्स, मार्बल, केमिकल और खाद्यान्न लेकर पहुंचे वाहन सीमा पर फंसे हुए हैं। जाम की वजह से चालक कई दिनों से ट्रकों में ही रहने को मजबूर हैं। खाने-पीने और अन्य जरूरी सुविधाओं के अभाव में उनकी परेशानी बढ़ गई है। नेपाल में नई सरकार के गठन के बाद कारोबारियों ने भारत से आयातित सामानों की मांग बढ़ा दी है। लेकिन एमआरपी अनिवार्यता लागू होने के बाद सीमा पर ट्रकों की जांच सख्त हो गई है। इससे ट्रकों की नेपाल सीमा में प्रवेश करने में अधिक समय लग रहा है। इस वजह से जाम की समस्या गंभीर होती जा रही है।
भैरहवा निवासी व्यापारी राजन अग्रवाल ने बताया कि ट्रकों के फंसे रहने से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन प्रत्येक वाहन पर करीब तीन हजार रुपये अतिरिक्त खर्च देना पड़ रहा है। उनकी करीब 10 गाड़ियां पिछले सात दिनों से बॉर्डर पर खड़ी हैं। वहीं कारोबारी नेत्र आचार्य ने बताया कि सामान लेकर आने वाले वाहन सोमवार से सोनौली बॉर्डर पर फंसे हैं। उन्हें नेपाल में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। एक दिन का करीब 40 हजार रुपये डिटेंशन चार्ज लग रहा है, जिससे सामान की लागत लगातार बढ़ रही है और व्यापार करना मुश्किल होता जा रहा है।
लंबे जाम के कारण आसपास के लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार वाहनों के शोर, धूल और सड़क जाम से आमजन की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।
बॉर्डर पर ट्रकों की लंबी कतार से चालक परेशान
सीमा पर जाम लगने से कई चालकों के सामने खाने-पीने का संकट बढ़ गया है। इन दिनों ट्रकों की लंबी कतारें लगने से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। कई किलोमीटर तक लगे वाहनों के कारण जहां ट्रक चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं आसपास रहने वाले लोग भी शोर और जाम से त्रस्त हैं। लगातार बजते हॉर्न और धूल से स्थानीय लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है।
एक ट्रांसपोर्ट के मैनेजर अमित पांडेय ने बताया कि जाम के कारण गाड़ियां एक ही जगह पर रुक जा रही हैं। सोनौली सीमा से नेपाल काठमांडो पोखरा बुटवल भैरहवा जाने वाले सामानों के लिए भारत के महानगरों से कोई चालक समान लोड करने को तैयार नहीं हो रहा है। जितने में बुकिंग किया गया उसमें नुकसान हो रहा है। वर्तमान में लोडिंग रोक दी गई है।
एक अन्य ट्रांसपोर्ट के प्रबंधक सुरेंद्र शर्मा ने बताया कि बॉर्डर पर लोड ट्रक आकर अटक जा रही है। जिसके कारण चालक गाड़ी मालिक मालिक को एक दिन का डिटेंशन चार्ज दो हजार से लेकर तीन हजार देना पड़ रहा है।
बॉर्डर पर जाम से स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी
सोनौली बॉर्डर पर लगे करीब 12 किलोमीटर लंबे जाम का असर अब स्थानीय लोगों की दिनचर्या पर भी पड़ने लगा है। सीमा के शून्य बिंदु से लेकर करीब 12 किलोमीटर तक सड़क की एक लेन पूरी तरह मालवाहक वाहनों से भरी हुई है, जिससे लोगों का आना-जाना मुश्किल हो गया है। सोनौली कस्बा, कुनसेरवा, गौतम बुद्ध नगर समेत बाईपास क्षेत्र के ग्रामीणों को अपने घरों तक पहुंचने और वाहन खड़ा करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग के विस्तार कार्य के चलते समस्या और गंभीर हो गई है। स्थानीय निवासी बुद्धिराम, सागर, सुदर्शन और विनय यादव ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से उनके घरों के सामने ट्रकों की लंबी कतार लगी हुई है। घर से बाहर निकलने और वापस आने में काफी परेशानी हो रही है। उन्होंने कहा कि ट्रक चालक वाहनों को सटाकर खड़ा कर देते हैं, जिससे बाइक निकालना भी मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि लगातार वाहनों के हॉर्न और धूल से भी लोग परेशान हैं। जाम के कारण छोटे वाहन चालकों और राहगीरों को भी घंटों फंसना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द व्यवस्था सुधारने और जाम हटाने की मांग की है।
वर्जन
शराब फैक्ट्री का बोतल लेकर आया हूं। दो दिन में माल खाली कर लौटने की उम्मीद लेकर आए थे लेकिन यहां कई दिनों से फंसे हुए हैं। लंबे इंतजार के कारण खाने-पीने की समस्या खड़ी हो गई है। कई चालकों के पास अब खर्च के पैसे भी कम पड़ने लगे हैं। चालक रात-दिन ट्रकों में ही समय काटने को मजबूर हैं।
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-राहुल शर्मा, ट्रक चालक फिरोजाबाद

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बॉर्डर पर जांच और वाहनों की धीमी आवाजाही के कारण स्थिति लगातार खराब हो रही है। ट्रक की किस्तें भी देनी है। इधर व्यापारियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। ट्रकों के लंबे समय तक फंसे रहने से मालभाड़ा बढ़ रहा है। परिवहन में देरी होने से सामान समय पर बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा है, इससे व्यापार प्रभावित हो रहा है।
-राकेश कुमार, ट्रक चालक, निवासी बिहार
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