महराजगंज। उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग में दर्ज शिकायत के बाद जिले के निचलौल में स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जच्चा-बच्चा की लापरवाही से हुई मौत के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है।
मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से गठित तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दो स्टाफ नर्सों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए संस्तुति की गई है। सीएमओ डॉ. श्रीकांत शुक्ला ने बताया कि गाजियाबाद निवासी राजहंस बंसल ने उत्तर प्रदेश मानव अधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी बहन आरती निवासी रुदौली निचलौल की 24 दिसंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र निचलौल में लापरवाही के कारण मृत्यु हो गई।
आरती को टूविन प्रेग्नेंसी थी और उनकी संभावित डिलीवरी डेट 22 फरवरी थी, लेकिन समय से पहले प्रसव पीड़ा होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्होंने बताया कि इस मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। इसमें अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. वीरेंद्र आर्या और जिला कार्यक्रम प्रबंधक नीरज कुमार सिंह शामिल थे।
तीन सदस्यीय टीम की ओर से आठ फरवरी को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। इसमें जानकारी मिली कि आरती को भर्ती के दौरान इमरजेंसी ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक को नहीं दिखाया गया था।स्टाफ नर्स गीता गुप्ता और गीता देवी ने लापरवाही बरतते हुए मरीज को आवश्यक चिकित्सा परामर्श नहीं दिलाया गया था। इससे मां और नवजात की मौत हो गई।