महराजगंज। नेपाल में बारिश का असर भारतीय क्षेत्र की नदियों पर दिख रहा है। अभी तो धीरे-धीरे जलस्तर बढ़ रहा है। अगर लगातार बारिश होती रही तो आने वाले दिनों में समस्या हो सकती है।
जलस्तर बढ़ने से गंडक, रोहिनी, महाव, बघेला, राप्ती पर असर पड़ सकता है। पानी का दबाव बढ़ने से समस्या हो सकती है। वहीं बंधों की सुरक्षा को लेकर विभाग की ओर से कड़ी निगरानी की जा रही है। सुरक्षात्मक कार्य भी कराए जा रहे हैं। नेपाल की पहाड़ियों पर रविवार रात में मूसलधार बारिश होने से भारतीय क्षेत्र की नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है।
नारायणी नदी के बी गैप बांध पर तैनात सिंचाई खंड द्वितीय के अवर अभियंता रविन्द्र यादव ने बताया कि 22 जून को नारायणी नदी का जलस्तर जहां 40 हजार क्यूसेक था। वहीं 23 जून को नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ते हुए 65 हजार क्यूसेक पहुंच गया है।
जलस्तर अभी अगले कुछ घंटों तक और बढ़ने की आशंका है। हालांकि नदी का डेंजर जोन 3 लाख 70 हजार क्यूसेक पर है। दूसरी ओर भारतीय क्षेत्र में गंडक खतरे के निशान से तीन मीटर तो महाव नाला दो मीटर नीचे है। चंदन, रोहिन भौराबारी में पानी का स्तर सामान्य है। वहीं अन्य नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
सगरहवा के महेश यादव ने बताया कि महाव का पूर्वी बांध टूटने से बरगदवा क्षेत्र के बरगदवा, देवघट्टी, हरखपुरा, शिकारगढ़ नरायनपुर, हरपुर, अमहवा, बेलहिया, खजहिया, गनेशपुर आदि गांव प्रभावित होता है।
पश्चिमी तटबंध टूटने से खैरहवा दूबे, कोहरगड्डी, असुरैना, दोगहरा, विशुनपुरा, जहरी, सागरहवा, महरी घोड़हवा, लुठहवा, गंगवालिया आदि गांवों को नुकसान होता है। बघेला नाला नेपाल के पहाड़ी से निकल कर नौतनवा तहसील क्षेत्र के रेहरा गांव के पास भारतीय क्षेत्र में प्रवेश करती है।
22 किलोमीटर की दूरी में प्रवाहित होते हुए चकदह गांव के पास जंगल में दोमुहान घाट पर प्यास नदी में मिल जाती है। नाले की सफाई न होने से बरसात के समय बाढ़ का पानी उफनाकर सिवान में फैल जाता है।
बीते दिनों में हुई बरसात से बघेला नाले का जलस्तर बढ़ गया है। बघेला उफान पर थी और खेतों में पानी फैल गया था। ग्रामीण अनिल कुमार, महबूब अली, जय किशुन यादव, राम बचन यादव का कहना है कि बघेला की सफाई व चौड़ीकरण होना जरूरी है।