महराजगंज। जिले में रविवार सुबह मौसम ने अचानक करवट ली और रिमझिम बारिश शुरू हो गई। यह बारिश गेहूं की फसल के लिए फायदेमंद है जबकि आलू की खेती के लिए नुकसानदायक है।
निचलौल क्षेत्र के किसान पलकधारी पांडेय, संतोष चौबे, गुड्डू पटेल, दीपक गुप्ता आदि ने कहा कि बारिश होने के चलते अगले अगले कुछ दिनों तक मौसम ठंडा होने से गेहूं के झाड़ में भी वृद्धि होने की उम्मीद है। कहा की फरवरी माह में यदि मौसम ठंडा रहता है, तो गेहूं की फसल में दो से ढाई क्विंटल तक अधिक झाड़ प्राप्त होती है। हालांकि आलू की फसल में अधिक नमी के कारण बीमारियों का प्रकोप बढ़ने की संभावना है। आलू की फसल में झुलसा रोग का खतरा बढ़ जाता है।
मनकापुर गोंडा के वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. रामलखन सिंह ने कहा कि बेमौसम बारिश से रबी की फसल गेहूं, जौ, तिलहन और दलहन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बल्कि इससे किसानों की एक सिंचाई की बचत हुई है। जहां माहू कीट की शुरुआत हुई है। वहां पर बारिश ने कीट के प्रकोप को कम करने का काम किया है। हालांकि जैसे ही तापमान बढ़ेगा, मटर की फसल में चूर्णित आसिता रोग लगने की आशंका है। लगातार बादल छाए रहने से आलू में झुलसा रोग लगने की आशंका है। उन्होंने बताया कि फसलों में ज्यादा नमी होने पर कवक व जीवाणु जनित रोग होने, कीड़ों का आक्रमण होने की आशंका रहती है।
खेतों में करें जल निकासी का प्रबंध
कृषि वैज्ञानिक ने सलाह दी है कि किसान अपने खेतों में जल निकासी का भी समुचित प्रबंध करें। फसल के किनारे एक फीट गहरी नाली बना दें, ताकि खेत में भरा पानी नाली से होकर बाहर निकल जाए। बदलते मौसम में प्याज व लहसुन की फसल भी ज्यादा प्रभावित होती है। इसके लिए सुगामाईसिन पांच प्रतिशत के साथ कापर आक्सीक्लोराइड 45 प्रतिशत डब्ल्यूपी 300 ग्राम प्रति एकड़ खेत में 200 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करें।