महराजगंज। आनंदनगर-महराजगंज-घुघली प्रस्तावित रेल मार्ग को लेकर तेजी से काम चल रहा है। आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय रेल मार्ग से जुड़ेगा तो परिवहन की समस्या दूर हो जाएगी। लोगों की जीवन की गाड़ी दौड़ने लगेगी।
वहीं उद्योग धंधों के विकास को बल मिलेगा। बदल रहे महराजगंज की तस्वीर में बहुत कुछ नया हो जाएगा। जिन क्षेत्रों में वर्तमान में रोजगार के अवसर नहीं हैं। वहां लोगों को आत्मनिर्भर बनने की राह आसान होगी। महराजगंज ऐसा जिला मुख्यालय है जो अभी तक रेल सुविधा से अछूता है।
जानकारी के अनुसार नई रेल लाइन परियोजना के लिए कुल लंबाई 53 किलोमीटर होगी। इसके निर्माण के लिए 57 गांवों में करीब 194 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। अब तक 1.11 अरब रुपये से अधिक का मुआवजा भुगतान किया जा चुका है। नई रेल लाइन निर्माण के लिए पुलों का निर्माण, रेल पटरियों का विस्तार और अन्य संरचनात्मक काम शामिल हैं। रेलवे ने इन परियोजना को प्राथमिकता दी है, ताकि जिला मुख्यालय को रेलवे लाइन से जोड़ा जा सके और क्षेत्रीय विकास में मदद मिल सके।
इन दिनों महराजगंज जिला मुख्यालय से दिन ढलने के बाद कहीं आने जाने में दुश्वारियां होती हैं। महुअवा के पास स्टेशन बनने की बात कही जा रही है। वर्तमान में यह क्षेत्र नगर पालिका का हिस्सा बन चुका है। इस क्षेत्र में स्टेशन बनेगा तो आसपास दुकानों के साथ होटल आदि बनेंगे। इससे क्षेत्र में विकास के साथ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। महुअवा के रामप्रीत कहते हैं कि वर्तमान में आसपास दुकानों की संख्या कम है। आने वाले दिनों में क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। परिवहन की समस्या भी दूर हो जाएगी। महुअवा चौराहे पर मिले धीरेंद्र ने बताया कि गुजरे वक्त में कोई इस क्षेत्र में जमीन नहीं खरीदना चाहता था, लेकिन अब तो जमीनों के भाव बढ़ गए हैं। संभावित स्टेशन के आसपास लोग जमीन खरीद लिए हैं। आने वाले समय में क्षेत्र में बहुत कुछ बदल जाएगा। उधर, रेलवे में जिन जमीनों को चिह्नित कर लिया गया है उनके रेट को लेकर लोग परेशान हैं। किसी की खरीदी हुई जमीन तो किसी का घर दायरे में आ रहा है। ऐसे में लोग मुआवजे को लेकर संशय में हैं।
यहां के लोग बीते दिनों हाईकोर्ट में राय लेने पहुंचे थे। लोगों के मुताबिक मुआवजा कृषि सर्किल रेट से दिया जा रहा है, जबकि जमीन आवासीय है। ऐसे में जमीन और घर में लगी पूरी रकम डूब जाएगी। पीड़ित इधर-उधर भटक रहे हैं। कुछ लोग तो ऐसे हैं, तो पूरी कमाई ही घर में लगा दिए हैं। उन्हें चिंता सता रही है कि भविष्य में घर कैसे बनवा पाएंगे।