महराजगंज। जिले में मानव वन्य जीव संघर्ष कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन जिम्मेदार इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कभी वन्य जीव तो कभी मानव वन्य जीव के हमले का शिकार हो जाते हैं। वन विभाग सिर्फ जागरूक रहने की नसीहत देकर अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ले रहा है।
जानकारों का कहना है कि सिर्फ जागरूकता अभियान से काम नहीं चलने वाला। वन्य जीवों के हमलों से लोगों को बचाने के लिए जंगल के किनारे तार बाड़ लगाना जरूरी है। इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जिले का 342 वर्ग मीटर क्षेत्र वन से घिरा है। महराजगंज शहर से निचलौल का सफर तय करने के बाद निचलौल कस्बा मिला। कस्बे से चमनगंज पुल पार कर जंगल की ओर करीब पांच किमी आगे बढ़ने पर ढेसो गांव का पुल मिला। यह गांव जंगल के करीब है। यहां अक्सर तेंदुए आबादी में आते रहते हैं।
लोग कहते हैं कि जंगल के किनारे तार बाड़ नहीं होने से तेंदुए कभी मानव तो कभी पशुओं को निवाला बना रहे हैं। गांव के किनारे सड़क से जाने पर एक झोपड़ी में दुकान पर कुछ लोग चाय पीने आए थे।
चाय तैयार न होने से लोगों ने बेंच पर बैठकर आपस में चर्चा शुरू कर दी। गांव के मानवेंद्र सिंह दुकानदार से चाय लाने की बात कहकर बोले, कुछ भला होने वाला नहीं है। वन्य जीवों से सुरक्षा क्षेत्र का बड़ा मुद्दा है। दुर्भाग्य की बात है कि इसपर किसी का ध्यान नहीं है। उनको रोकते हुए छोटेलाल राय कहने लगे कि तार बाड़ से ही राहत मिलेगी। कोई नेता इस पर आवाज नहीं उठाता है।
मुंजेश शर्मा ने प्रतिवाद किया। कहा कि ऐसा नहीं है, कुछ क्षेत्रों में तारबाड़ है। इधर भी लग जाए तो अच्छा रहेगा। सबकी बातों को काटते हुए गनेश सिंह कहने लगे कि सरकार को कुछ करना चाहिए। जोगेंद्र गौंड भी हां में हां मिलाते हुए कहने लगे की किसी को यह समस्या याद नहीं आती है। इतना सुनते ही श्रीकांत खड़े हो गए। कहने लगे.. बाबू इ बतकही से कुछ नाही होई, आपन सुरक्षा खुद करे के पड़ी। संवाद