महराजगंज। कुत्ता, बंदर, सियार, बिल्ली या अन्य जानवर के काटने पर घबराने की जरूरत नहीं है। जिला अस्पताल में इसका पुख्ता प्रयास शुरू कर दिया गया है। एआरवी के साथ सीरम भी आ चुका है, जिसे घाव पर इंजेक्ट कर सुरक्षा चक्र मजबूत किया जा रहा। इस सुविधा का लाभ दो दिन में 13 को दिया जा चुका है।
जानवरों के काटने पर जिला अस्पताल में एआरवी के साथ सीरम भी लगाया जा रहा है। इससे मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और वह रैबीज से लड़ने में और सक्षम हो रहे हैं। जिला अस्पताल में रोजाना 4 से 5 मरीज कुत्ता, बंदर और बिल्ली के काटने से इलाज कराने के लिए पहुंचते हैं। इन्हें एआरवी इंजेक्शन लगाया जाता है।
कुछ मरीज ऐसे भी आते हैं, जिनके शरीर में काटने से गहरे घाव हो जाते हैं, उन्हें रैबीज एंटी सीरम लगाया जा रहा है। पहले मरीजों को सीरम बाहर से खरीदकर लाना पड़ता था। अब सरकारी अस्पतालों में भी सीरम उपलब्ध है।
गहरा घाव होने पर सीरम को उसी के पास लगाया जाता है। कभी-कभी हाथ में लगाया जाता है। इससे मरीज की रैबीज से लड़ने की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। इसमें मरीज जल्द स्वस्थ हो जाते है।
जिला अस्पताल में रैबीज एंटी सीरम उपलब्ध हो गया है। तीन दिन से यह प्रयुक्त भी किया जा रहा है। शीघ्र ही सीएचसी पर भी पहुंचा दिया जाएगा। यह सीरम अलग तरीके से इंजेक्ट होता है। सीएचसी फार्मासिस्ट जिला अस्पताल से इसे लगाने का तरीका सीख सकते हैं।
-डाॅ. एके द्विवेदी, सीएमएस