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Maharajganj News: भारत के मुकाबले नेपाल में चांदी 11,500 रुपये प्रति किलो महंगी, तस्करी को मिल रही हवा

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सोनौली। चांदी की कीमतों में गिरावट के बावजूद भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी का खेल थमता नजर नहीं आ रहा है। नेपाल में सोमवार को सामने आई 14 किलो 180 ग्राम चांदी जैसी धातु की बरामदगी ने एक बार फिर तस्करी की ओर ध्यान खींचा है। भारत के मुकाबले नेपाल में चांदी 11,500 रुपये प्रति किलो मंहगी है। इससे तस्करी को हवा मिल रही है।
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इससे पहले सोनौली समेत अन्य सीमावर्ती इलाकों में भी चांदी की कई खेप पकड़ी जा चुकी हैं। आखिर जब बाजार में चांदी के दाम गिर रहे हैं तो तस्करों की दिलचस्पी क्यों बढ़ रही है। इसकी एक संभावित वजह दोनों देशों में चांदी की कीमतों का अंतर माना जा रहा है।
नौतनवा के एक आभूषण कारोबारी ने बताया कि वर्तमान में भारतीय बाजार में चांदी का भाव दो लाख एक हजार रुपये प्रति किलो है, जबकि नेपाल में भारतीय मुद्रा के हिसाब से इसकी कीमत दो लाख 12 हजार 500 रुपये प्रति किलो है। यानी दोनों देशों के बाजारों में प्रति किलो 11,500 रुपये का अंतर है। इस हिसाब से 10 किलो चांदी की कीमत में ही 1.15 लाख रुपये का अंतर बैठता है। हालांकि, यह पूरा अंतर शुद्ध मुनाफा नहीं है। वैध आयात में लगने वाले कर और अन्य खर्चों से बचने की कोशिश भी तस्करी की संभावित वजह हो सकती है।
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कार के चारों दरवाजों में छिपाई थी 14.18 किलो धातु
नेपाल के मकवानपुर जिले में रविवार को भारत से काठमांडू जा रही एक कार की तलाशी के दौरान 14 किलो 180 ग्राम चांदी जैसी धातु बरामद की गई। सोमवार को सामने आई कार्रवाई के मुताबिक, हेटौंडा उप महानगरपालिका-15 स्थित रातोमाटे चेकपोस्ट पर जांच के दौरान कार के चारों दरवाजों में बनाई गई गुप्त तह से संदिग्ध सामग्री मिली। मामले में रमेश सोनार, उसकी पत्नी चंदा सोनार समेत परिवार के चार सदस्यों को पकड़ा गया। बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत करीब 40.69 लाख नेपाली रुपये बताई गई है।

सोनौली में लग्जरी कार से पकड़ी गई थी 10 किलो चांदी
भारत-नेपाल सीमा के प्रमुख कारोबारी नाके सोनौली पर भी चांदी की तस्करी के मामले सामने आ चुके हैं। आठ जनवरी को कस्टम विभाग ने नेपाल जा रही एक लग्जरी कार से करीब 10 किलो चांदी बरामद की थी। इसकी अनुमानित कीमत 25.69 लाख रुपये बताई गई थी। कार में विशेष कैविटी बनाकर चांदी छिपाई गई थी। मामले में दो नेपाली नागरिक पकड़े गए थे। इसके बाद जून में एसएसबी की 22वीं वाहिनी ने सोनौली सीमा पर जयपुर निवासी एक युवक के बैग से 500 ग्राम चांदी के छोटे दाने बरामद किए थे। युवक काठमांडो जा रहा था। संतोषजनक दस्तावेज नहीं मिलने पर उसे बरामद सामग्री सहित कस्टम विभाग को सौंप दिया गया था।

सीमा शुल्क से बचने और बाजार भाव के अंतर पर नजर
चांदी की तस्करी के पीछे केवल बाजार में तेजी या मंदी नहीं बल्कि दोनों देशों की कीमतों और कर व्यवस्था का अंतर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, अवैध तरीके से चांदी सीमा पार पहुंचाने के पीछे सीमा शुल्क और अन्य वैधानिक खर्चों से बचना भी एक संभावित कारण हो सकता है। वास्तविक मुनाफा खरीद मूल्य, शुद्धता, परिवहन और अन्य खर्चों पर निर्भर करता है।

तस्करी के बदलते तरीके भी चुनौती
हाल की बरामदगी में तस्करी के तरीकों में भी समानता सामने आई है। सोनौली में पकड़ी गई लग्जरी कार में विशेष कैविटी बनाई गई थी, जबकि नेपाल के मकवानपुर में कार के चारों दरवाजों के भीतर चांदी जैसी धातु छिपाई गई थी। इससे स्पष्ट है कि संदिग्ध सामग्री को सामान्य जांच से बचाने के लिए वाहनों में गुप्त स्थानों का इस्तेमाल किया जा रहा है। चांदी की खेप कहां से खरीदी जा रही है, इसका वास्तविक मालिक कौन है और सीमा पार इसे किस कारोबारी तक पहुंचाया जाना था। लगातार हो रही बरामदगी के बीच इन सवालों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। भारत-नेपाल सीमा पर चांदी के भाव में प्रति किलो 11,500 रुपये का अंतर और बार-बार सामने आ रही बरामदगी ने इस कारोबार को फिर चर्चा में ला दिया है। बाजार में कीमतें भले ही नीचे आ रही हों, लेकिन दोनों देशों के बीच मूल्य का अंतर अवैध कारोबार के लिए अब भी आकर्षण बना हो सकता है।
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बोले अधिकारी
बरामद चांदी के आभूषण की जांच के लिए टीम लगी है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
प्रमोद कुमार साह, डीएसपी, हेटौंडा
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