जन साहित्यिक मंच की तरफ से कवि गोष्ठी आयोजित
संतकबीरनगर। जन साहित्यिक मंच के तत्वावधान में रविवार को शहर के एक रेस्टोरेंट में मासिक कवि गोष्ठी हुई। इसमें वरिष्ठ कवि राजेंद्र बहादुर सिंह ने गोष्ठी की शुरुआत अपनी रचना राजनीति ने ली अंगड़ाई, जातिवाद की आंधी आई से की।
मंच के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सरदार हरिभजन सिंह भजन ने चाहने वालों की एक भीड़ लगी रहती है, आजकल आप का दीदार बहुत महंगा है, सुनाकर वाहवाही लूटी। हसमत अमीजी ने सच कह देंगे गला कटेगा इतना हम भी जाने हैं, हम सच्चाई के दीवाने कहे बिना कब माने हैं, सुनाकर सच्चाई के मार्ग की कठिनाइयों को बताया।
राधेश्याम मिश्र श्याम ने आंसुओं को नहीं बहाना है, बल्कि हर गम में मुस्कराना है, सुनाकर गम में भी खुश रहने के लिए प्रेरित किया। ओम प्रकाश गौतम ने कहते हैं बहाया गया हूं मैं दरियाव लहूं का, काटे नहीं नाखून जरा सा मेरे आगे, सुनाया, जिसे खूब सराहा गया।
उस्ताद शायर मजहर खलीलाबादी ने इस दर्जा इंतजार की घड़ियां गुजर गईं, आंखों की पुतलियां हैं कि बेमौत मर गई, सुनाकर गोष्ठी को ऊंचाई पर पहुंचाया। सूरज कुंवर सरस ने वाणी पर संयम रखिए तो, जीव स्वरूप रतन हो जाए, सुनाकर वाणी पर संयम रखने की सलाह दी।
गोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे नरसिंह नारायण कमल ने ताल पोखरे नदी सब, आज हुए जलहीन, पशु पक्षी सब सोचते चिंता करते मीन, सुनाकर जल संरक्षण करने की सलाह दी।
गोष्ठी में अवधेश पांडेय, हामिद खलीलाबादी, अवनीश कुमार, शाहरुख सागर, आराध्या आदि ने भी अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। अंत में मशहूर शायर पदमश्री से सम्मानित बशीर बद्र के निधन पर उनकी आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया।