विकास कार्यों पर उठे सवाल, अध्यक्ष-सभासदों के टकराव से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
नगरवासियों ने कहा- संवाद और सम्मान से समाधान निकलना जरूरी
महराजगंज। नगर पंचायत निचलौल में अध्यक्ष और सभासदों के बीच बढ़ी खींचतान अब बड़े राजनीतिक संकट का रूप लेती दिखाई दे रही है। 16 में से 10 सभासदों के इस्तीफा देने से अब मात्र पांच निर्वाचित और एक मनोनीत सभासद ही बोर्ड में बचे हुए हैं। हालांकि अभी किसी का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार को आठ निर्वाचित और एक मनोनीत सभासदों के अधिशासी अधिकारी (ईओ) को सामूहिक इस्तीफा सौंपेने के बाद नगर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। शुक्रवार को भाजपा समर्थित महिला सभासद प्रीति यादव भी नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए इस्तीफा दे चुकी हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली और बोर्ड के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बोर्ड में अब एक मनोनीत सहित महज तीन सभासद ही बचे हैं।
नगर पंचायत अध्यक्ष शिवनाथ मद्धेशिया समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने थे। बाद में उन्होंने राजनीतिक रुख बदलते हुए भाजपा के कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करने लगे और बाद में उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली। इस दौरान नगर में कई विकास कार्य भी हुए लेकिन हाल के दिनों में अध्यक्ष और सभासदों के बीच तालमेल बिगड़ने से स्थिति राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं। सामूहिक इस्तीफे के बाद नगर के चौराहों से लेकर सोशल मीडिया तक इसी मुद्दे की चर्चा हो रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस्तीफे स्वीकार होते हैं तो 13 सदस्यीय बोर्ड में केवल तीन सदस्य ही शेष रह जाएंगे। ऐसे में बोर्ड स्पष्ट बहुमत खो देगा और कोरम के अभाव में प्रस्ताव पारित करना कठिन हो जाएगा। इससे नई योजनाओं की स्वीकृति, बजट पारित होने और विकास कार्यों पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति इस्तीफों की वैधानिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगी।
नगरवासियों का मानना है कि राजनीतिक गतिरोध का शीघ्र समाधान होना चाहिए, ताकि विकास कार्यों की गति प्रभावित न हो और नगर पंचायत में सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था बहाल रह सके। प्रशासनिक स्तर पर फिलहाल इस्तीफों पर आगे की कार्रवाई और बोर्ड की स्थिति पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
स्पीकअप
अध्यक्ष और सभासद दोनों जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि हैं। यदि सभासद सम्मान की कमी महसूस कर रहे हैं तो अध्यक्ष को सभी को साथ लेकर आपसी सामंजस्य स्थापित करना चाहिए। बोर्ड की बैठकें नियमित न होने और कई वार्डों में सफाई व्यवस्था प्रभावित रहने की शिकायतें चिंता का विषय है।
- गोविंद चौधरी, घोड़हवा वार्ड
तीन कार्यकाल तक सभासद के रूप में काम किया लेकिन कभी ऐसी स्थिति नहीं रही कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को सामूहिक इस्तीफा देना पड़े। यह नगर के लोकतांत्रिक माहौल के लिए चिंताजनक संकेत है।
-बिहारी लाल, मियां वार्ड के पूर्व सभासद
सामूहिक इस्तीफे से नगर के विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। अध्यक्ष और सभासद आपसी मतभेद दूर कर जनता के हित में मिलकर कार्य करें।
- धीरज वर्मा, लोहिया वार्ड