जिले में झोलाछाप चला रहे अवैध अस्पताल, बन रहे मरीजों की मौत का कारण - लापरवाही से मौत के बाद सक्रिय हो जाते हैं दलाल, समझौते का दबाव
महराजगंज। जिले में झोलाछाप डॉक्टरों और अवैध अस्पतालों का नेटवर्क मरीजों की जिंदगी के लिए लगातार खतरा बना हुआ है। बिना योग्यता और मानकों के इलाज कर रहे ये लोग खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह गई है। सख्त कार्रवाई के अभाव में झोलाछाप के हौसले बुलंद हैं, जिसके कारण आए दिन इनके इलाज से लोगों की जान जा रही है।
मौत के बाद ‘मैनेजमेंट’ का खेल :
सूत्रों के मुताबिक, किसी मरीज की मौत होते ही दलालों का नेटवर्क सक्रिय हो जाता है। ये लोग पीड़ित परिवार पर समझौते का दबाव बनाते हैं। कभी डराकर, तो कभी लालच देकर। परिजनों को कोर्ट-कचहरी के लंबे और खर्चीले झंझट का भय दिखाया जाता है और तत्काल मुआवजे के नाम पर मामला दबाने की कोशिश होती है। अक्सर दबाव और भ्रम में आकर पीड़ित परिवार समझौता कर लेते हैं, जिससे आरोपियों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती।
विभागीय कार्रवाई पर उठते सवाल : जब मामला तूल पकड़ता है तब स्वास्थ्य विभाग सक्रियता दिखाते हुए संबंधित अस्पताल को सील कर देता है लेकिन यह कार्रवाई स्थायी समाधान साबित नहीं हो रही।हालात यह हैं कि कुछ समय बाद मामला ठंडा पड़ते ही वही संचालक या तो दूसरे स्थान पर नया अस्पताल खोल लेते हैं या नए नाम से पंजीकरण कराकर फिर से काम शुरू कर देते हैं। इससे विभागीय निगरानी और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
निरीक्षण में खुली अव्यवस्थाओं की परतें :
हाल ही में मऊपाकड़ स्थित नोवा हॉस्पिटल एंड डायबिटीज केयर के निरीक्षण में कई गंभीर खामियां सामने आईं। अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. वीरेंद्र आर्या के नेतृत्व में जांच टीम को अस्पताल में कोई योग्य चिकित्सक नहीं मिला। केवल एक अयोग्य पैरामेडिकल स्टाफ और एक एएनएम मौजूद थी। जांच में बिना पंजीकरण एक्स-रे मशीन का संचालन, मानकों के विपरीत ओटी, और बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन व प्रदूषण नियंत्रण एनओसी की अवधि समाप्त पाई गई। इन गंभीर अनियमितताओं के बाद ओटी को सील कर दिया गया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने 18 मार्च को अस्पताल प्रबंधन को नोटिस जारी कर तीन दिन में स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन 21 मार्च तक कोई जवाब नहीं दिया गया।
लगातार सामने आ रहे मौत के मामले
केस 1:
पनियरा के एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान 25 वर्षीय महिला की मौत हो गई। शिकायत पर संबंधित डॉक्टर के खिलाफ लापरवाही का मुकदमा दर्ज हुआ।
केस 2:
अक्टूबर 2023 में रजौड़ा खुर्द के 55 वर्षीय व्यक्ति की सामान्य बीमारी के दौरान गलत इलाज से मौत हो गई। शिकायत के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
केस 3:
अप्रैल 2025 में रेफर की गई महिला को निजी अस्पताल में भर्ती कराने के बाद जच्चा-बच्चा दोनों की मौत हो गई।
जिम्मेदारों का दावा
झोलाछाप के खिलाफ लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में इसी तरह के एक मामले में एक अस्पताल को नोटिस जारी किया गया है। अस्पताल प्रबंधन के जवाब का इंतजार है। उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।
नवनाथ प्रसाद , सीएमओ