फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Maharajganj News: सेहत से खिलवाड़... पाउडर के दूर से पनीर बनाने का 15 लाख से अधिक का कारोबार

Thu, 29 May 2025 12:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
विज्ञापन
विज्ञापन
- महराजगंज में हर रोज खपाया जा रहा था 15 से 20 क्विंटल पिपराइच में बना कृत्रिम पनीर, मिलावट के खेल में धंधेबाज हो रहे मालामाल
विज्ञापन

महराजगंज। शहर के बाजाराें में 15 से 20 क्विंटल कृत्रिम पनीर रोजाना खपाया जा रहा है। धंधेबाज इसे पिपराइच से लाकर जिले में खपा रहे थे। मांग बढ़ने पर मात्रा बढ़ा भी दी जाती थी। इसे चिह्नित दुकानों पर लाकर रख दिया जाता था। गोरखपुर में मिलावट के खेल का खुलासा होने पर इसके तार महराजगंज से जुड़े मिले हैं। गोरखपुर में बना कृत्रिम पनीर लाकर महराजगंज में खपाया जा रहा था।

कृत्रिम पनीर पिपराइच से आने के अलावा शहर में भी बनाया जाता है। सूत्र बताते हैं कि खपत अधिक होने पर आपूर्ति बाहर से की जाती है। यहां अधिक मात्रा में बनाने की व्यवस्था नहीं है। पाउडर के दूध की खपत भी यहां कम नहीं होती है। कारोबारियों के अनुसार औसतन एक माह में 50 टन की खपत है। सहालग में 75 से 80 टन के आसपास पाउडर के दूध की खपत हो जाती है। एक टन की कीमत 31,200 रुपये है। ऐसे में 50 टन की कीमत 15.60 लाख रुपये होगी। एक किलो पाउडर से 12 लीटर दूध आसानी से बन जाता है। इसपर कम से कम 312 रुपये प्रति किलो खर्च होता है। यहां 312 रुपये खर्च कर 720 रुपये का दूध आसानी से बिक जाता है। इसमें कोई समस्या भी नहीं है।
विज्ञापन

सूत्रों की मानें तो बढ़ती मांग को देखते हुए पनीर से लेकर मिठाई बनाने में इसका उपयोग हो रहा है। घर और दुकान पर आने वाले दूध में भी इसी पाउडर से बना हुआ पहुंचाया जा रहा है। इससे पनीर बनाने में खर्चा भी कम आता है और धंधेबाजों को मोटा मुनाफा होता है। शहर के एक दुकान काम करने वाले कारीगर महेश ने बताया कि मांग इतनी है कि स्थानीय दूध से पूरी नहीं हो सकती है। ऐसे में विवश होकर पाउडर का दूध मंगाना पड़ता है। उधर, कारोबारी बताते हैं कि हर माह सामान्य दिनों में करीब 15 लाख से कारोबार हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि गोरखपुर जिले में कार्रवाई होने के बाद धंधेबाजों ने महराजगंज का रुख कर लिया है। यहां वे सुरक्षित ठौर की तलाश में हैं। जहां से वे अपना धंधा आसानी से चला सके।
शहर के आसपास के क्षेत्रों में जाने पर पता चला कि गांव से दूध लाने के बाद उसमें पाउडर वाला दूध मिलाकर पनीर बनाया जाता है। इससे लागत कम हो जाता है। शहर के शास्त्री नगर के वीरेंद्र कहते हैं कि अब तो पनीर दुकान से खरीदने का मन नहीं करता है। दो दिन पर घर पनीर की सब्जी बनी तो पेट खराब हो गया था। पनीर ठीक नहीं रहा होगा, इससे समस्या हो गई। रकम भी खर्च हो रही है और सामान भी शुद्ध न मिले तो क्या किया जाएगा। शांति देवी कहती है कि अब तो घर में ही दूध मंगाकर पनीर बना लिया जाता है।

दुकानों से लेकर घरों में करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत

जिले में तीन हजार लीटर रोजाना दूध का उत्पादन होता है। विभागीय योजनाओं से 21 डेयरी का संचालन होता है। शहर में रोजाना दुकानों से लेकर घरों में करीब तीन लाख लीटर दूध की खपत होती है। मांग के हिसाब से यह घटता-बढ़ता रहता है। सहालग और अन्य विशेष अवसरों पर खपत चार लाख लीटर रोजाना पहुंच जाती है, जबकि पशुपालक से लगभग एक लाख लीटर दूध की ही आपूर्ति कर पाते हैं। वहीं, पैक दूध का कारोबार करने वाली कंपनियां भी करीब एक लाख लीटर दूध की आपूर्ति कर रही हैं। दूध की बिक्री करने वाले कहते हैं कि घरों में गाय का दूध 50 तो भैंस का 60 रुपये प्रति लीटर दिया जाता है। पानी के अलावा कुछ नहीं मिलाया जाता है।



एक किलो पनीर बनाने के लिए पांच लीटर दूध की जरूरत

शहर में 320-340 रुपये प्रति किलो की दर से पनीर बिक रहा है। जानकारों की मानें तो एक किलो पनीर बनाने के लिए कम से कम पांच लीटर दूध की जरूरत पड़ती है। एक लीटर दूध 60 रुपये में आता है। एक किलो पनीर के लिए 300 रुपये से अधिक का दूध लगता है। प्रोसेसिंग चार्ज अलग से शामिल है। ऐसे में पनीर की न्यूनतम लागत 300 से 350 रुपये प्रतिकिलो पहुंच जाती है। ऐसे में सस्ते पनीर में मिलावट की संभावना रहती है।
विज्ञापन

-
खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर विभाग की ओर से सतत निगरानी की जा रही है। अभियान चलाकर नमूना जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद नियम के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. टीआर रावत, सहायक आयुक्त, खाद्य सुरक्षा द्वितीय
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें