जिस बेटी को मां ने नौ महीने गर्भ में पाला, जिसके लिए अनगिनत तकलीफें उठाईं। गरीबी की दुश्वारियों से घबराकर उसी मां ने दुनिया में आते ही उसे हमेशा के लिए अनजान हाथों में सौंप दिया। ममता के दूसरे आंचल ने नन्ही परी को छांव दी। हालांकि, कानून की नजर में बिटिया के भविष्य की वैधानिक मुश्किलें बरकरार हैं।
इन मुश्किलों के हल के लिए पुलिस ने यशोदा मां को तलब किया है। पुरंदरपुर क्षेत्र की एक महिला प्रसव पीड़ा होने पर मायके से अपनी मां के साथ बनकटा सीएचसी पहुंची थी। ऑपरेशन से बिटिया का जन्म हुआ। बिटिया के जन्म पर न सोहर गाए गए न ही खुशियां बरसीं बल्कि दर्द के बादल छा गए।