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गुरु की सेवा ही, मोक्ष का फलदायी होता है : राजन

Fri, 01 Mar 2024 07:47 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महाराजगंज
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घुघली। माता-पिता ही प्रथम गुरु होते हैं। उनकी सेवा ही मोक्ष का सरल मार्ग प्रशस्त करता है। माता-पिता की सेवा के बगैर मंदिर में पूजा करना भी निष्फल है। माता-पिता की सेवा कर ली तो समझो गुरु का सानिध्य मिल गया। उनकी सेवा मात्र से सभी तीर्थों का फल प्राप्त हो जाता है।
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ये बातें शुक्रवार को घुघली हरखा प्यास में नौ दिवसीय श्री राम कथा के पहले दिन राजन महराज ने कही। वह श्रोताओं को माता, पिता व गुरु के महत्ता को बता रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने श्री मद भगवत में कहा है कि जो पुत्र अपने गुरु व माता, पिता की सेवा आदर व सम्मान के साथ नहीं करता वह नरक का भागी बनता है। यदि इस धरा पर कोई भी मानव आत्मसुख व आत्म शांति की कामना करता है तो उसे जन्म देने वाले व सतकर्मों का रास्ता दिखाने वालों का सम्मान जरूरी है।
उन्होंने श्रवण कुमार की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि शब्दभेदी बाण से घायल श्रवण कुमार से राजा दशरथ ने अपनी भूल के लिए क्षमा मांगा और पूछा कि मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं तो श्रवण कुमार ने राजा को अत्यंत दुखी देख कहा हे राजन मैं अपनी मृत्यु से दुःखी नहीं हूं दुःख इस बात का है कि मैं अपने अंधे माता-पिता की तीर्थ कराने की इच्छा पूर्ण न कर सका। इस समय मेरे माता पिता प्यासे हैं। कृपया पहले आप वहा जाय और उनकी प्यास शांत करें, तब उन्हें मेरे ऊपर घटी घटना सुना देना। इस अवसर पर राम कथा के दौरान शंकर पांडेय, शंभू, वरुण, नीरज, विनोद, वेद प्रकाश, राम ध्यान, चिंटू मौजूद रहे।
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