कृषि बाहुल्य जिले के यूथ चल रहे उद्यमिता की राह
उद्यान विभाग ने तीन को दिया 27 लाख का अनुदान
महराजगंज। कृषि बाहुल्य जिले के युवा उद्यमिता की राह चुन समृद्धि हासिल करने के साथ ही दूसरों को भी रोजगार दे रहे हैं। आत्मनिर्भरता की यह उड़ान उद्यान विभाग की ''प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना'' (पीएमएफएमई) से संभव हो रही है।
जानकारी के अनुसार, योजना के जरिये महज छह महीने में तीन युवाओं ने 27 लाख रुपये का अनुदान लाभ प्राप्त कर अपनी औद्योगिक इकाई शुरू की और तरक्की के प्रतिमान गढ़ रहे हैं। वर्ष 2026 में विभागीय अनुदान के सहारे तीन युवाओं ने औद्योगिक इकाइयों कीं। एक वर्ष से भी कम समय में तीनों औद्योगिक इकाइयों में 135 लोगों को प्रत्यक्ष तौर रोजगार मिला है। साथ ही सैकड़ों किसान और दुकानदार अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
हाईस्कूल पास मनोज नमकीन फैक्ट्री में 100 लोगों को दे रहे रोजगार
सदर ब्लॉक के चिउरहा स्थित एसएसबी कैंप के बगल में मनोज जायसवाल ने 85 लाख की लागत से नमकीन फैक्ट्री स्थापित की। इनदिनों वह 100 लोगों को रोजगार दे रहे हैं। हाईस्कूल पास जिले के खोस्टा निवासी मनोज चार साल तक नौकरी के लिए भटकते रहे। उद्यान विभाग से पीएमएफएमई की जानकारी मिलने पर उन्होंने अनुदान के लिए आवेदन किया। 85 लाख रुपये की लागत से उन्होंने आधुनिक नमकीन फैक्ट्री (प्रोसेसिंग यूनिट) की रूपरेखा प्रस्तुत की। स्वीकृति के बाद प्रोडक्शन मशीन इंदौर से तो पैकेजिंग मशीन बंगलूरू से मंगाकर स्थापित की।
मार्च 2026 से उनकी फैक्ट्री क्रियाशील है। वह कच्चा माल स्थानीय किसानों से सीधे खरीदते हैं। उद्यान विभाग से उन्हें 10 लाख रुपये का अनुदान और कुछ ऋण बैंकों से मिला। जून से उनकी फैक्ट्री का टर्नओवर 12 लाख रुपये महीने की है। उनकी फैक्ट्री से आलू, बेसन भुजिया, चटपटा चना और मसाला मटर, मसाला नमकीन गोरखपुर और बस्ती मंडल के जिलों में बेचे जा रहे हैं। मनोज बताते हैं कि योजना की चर्चा की तो दोस्तों ने कहा कि अनुदान पाने में ही आधा पैसा खर्च हो जाएगा। लेकिन बिना किसी खर्च के महज 15 दिनों में न सिर्फ उनका स्टार्टअप प्रोजेक्ट प्रोसेसिंग यूनिट के रूप में पास हुआ बल्कि अनुदान की पूरी रकम एक ही महीने में सीधे उनके बैंक खाते में पहुंच गई।
अंजू गृहणी से बनी उद्यमी, केवल आठवीं तक की है पढ़ाई
पिपरदेउरा की अंजू देवी गृहणी से उद्यमी की बन चुकी हैं। आठवीं पास होने के बाद भी उनका सपना उद्यमी बनना था। आज वह आठ लाख रुपये महीना कमाई करने वाली बेकरी की मालिक हैं। उनकी बेकरी ब्रेड, डबल रोटी, नानखटाई बिस्किट व टोस्ट की आपूर्ति करती है। बेकरी में कुल 20 लोगों को रोजगार मिला है। इसमें 15 स्थानीय और 5 कारीगर कारीगर पश्चिम बंगाल के हैं। अंजू ने बताया कि स्थानीय लोगों को 10 हजार तो पांच गैर प्रांत के बेकरी कारीगर को 15 हजार रुपये महीने का वेतन दिया जा रहा है।
अंजू ने बताया कि आठवीं पास होने के बाद तीन वर्ष पहले उनकी शादी घर वालों ने कर दी लेकिन उद्यमी बनने की चाह समाप्त नहीं हुई। पति का साथ लेकर उन्होंने विभागीय योजनाओं के लिए प्रयास शुरू किया तो उद्योग विभाग की प्रोसेसिंग यूनिट अनुदान की जानकारी मिली। उन्होंने बेकरी की प्रोसेसिंग यूनिट के लिए उद्यान विभाग की पीएमएफएमई के तहत आवेदन किया। 18 लाख रुपये की लागत से उन्होंने सदर के पिपरदेउरा में बेकरी और टोस्ट फैक्ट्री स्थापित की। इसमें उद्यान विभाग से 7 लाख रुपये का अनुदान मिला। आज उनके यहां बनने वाला रस्क, पाव, क्रीमबंद और केक महराजगंज ही नहीं पड़ोस के मित्र राष्ट्र नेपाल तक में बिक रहे हैं। अंजू ने बताया कि बेकरी का काम अलसुबह तीन बजे शुरू होकर दिन में 10 बजे तक खत्म हो जाता है। कुल सात घंटों में उनकी बेकरी से न सिर्फ माल तैयार होता बल्कि इसी अवधि में दुकानों तक सप्लाई भी हो जाती।
हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट से तरक्की का रास्ता गढ़ रहे नरेंद्र
सदर ब्लॉक के करमहा निवासी नरेंद्र इंटर पास हैं। रोजगार नहीं मिला तो हल्दी की प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने का प्रपोज़ल लेकर उद्यान विभाग गए। वहां पीएमएफएमई में उनका प्रपोजल पास हो गया। 10 लाख अनुदान व बाकी 15 लाख बैंक ऋण लेकर कुल 30 लाख की लागत से हल्दी प्रोसेसिंग यूनिट के सहारे अपने साथ 15 अन्य की आर्थिक स्थिति बेहतर कर रहे हैं। नरेंद्र ने बताया कि निचलौल व पनियरा क्षेत्र में हल्दी उत्पादन अच्छा है लेकिन प्रोसेसिंग यूनिट न होने से किसानों को औने-पौने दाम पर हल्दी बेचनी पड़ती थी। प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट लगाकर हल्दी पाउडर तैयार कर पैक किया जाता है। हल्दी की सफाई, सुखाई, पिसाई और पैकेजिंग का काम होता है। 15 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है और 100 से ज्यादा किसान उनसे जुड़े हैं।
वर्जन
प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना से खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने पर 35 फीसदी अनुदान मिलता है। अधिकतम 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। सब्सिडी टैग लगते ही धारकों को बैंक ऋण आसानी से मिल जाता है। इस वर्ष कुल तीन आवेदन मिले तीनों स्वीकृति के साथ 27 लाख रुपये की सब्सिडी दी गई।
-संजय कुमार रस्तोगी, जिला उद्यान अधिकारी, महराजगंज।