कोरोना से बचाव के लिए बूस्टर डोज लेने में बुजुर्ग पीछे
महराजगंज। कोरोनारोधी टीका लगवाने में तेजी लाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन इसकी गति कुछ खास नहीं बढ़ पा रही है। हालत यह है कि बूस्टर डोज लगवाने में बुजुर्गों में रुचि नहीं दिख रही है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के 2,11,715 लोगों ने पहला डोज लगवाया था, लेकिन इनमें से 6,484 लोगों ने ही दूसरा डोज लगवाया है।
इसी तरह 12 वर्ष से 14 वर्ष तक के किशोरों को दूसरा डोज लगाने की रफ्तार भी धीमी है। इस उम्र के दायरे में आने वाले 4,779 किशोरों को दूसरा डोज लगाया जा चुका है।
स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 12 से 14 वर्ष के 62.2 प्रतिशत किशोरों को प्रथम डोज एवं 4.7 प्रतिशत दूसरा डोज लगा है। 15 से 17 वर्ष के 84.3 प्रतिशत किशोरों को प्रथम डोज एवं 50.1 प्रतिशत को द्वितीय डोज लगा है। 18 से 44 वर्ष के सभी लोगों को प्रथम डोज लग चुका है। 76.1 प्रतिशत को दूसरा डोज लग चुका है। 45 से 59 वर्ष के 96.6 प्रतिशत लोगों को प्रथम डोज एवं 88.5 प्रतिशत को द्वितीय डोज लगा है। 60 वर्ष से ज्यादा उम्र के 94.3 प्रतिशत लोगों को प्रथम डोज लग चुका है। 87.5 प्रतिशत को द्वितीय डोज लगी है। 2.7 प्रतिशत बुजुर्गों को बूस्टर डोज लगा है।
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बूस्टर डोज लगवाना जरूरी
सदर सीएचसी के अधीक्षक डॉ. केपी सिंह ने बताया कि गंभीर बीमारी से ग्रसित बुजुर्गों को वैक्सीन की दूसरी डोज लगवाने के नौ महीने बाद बूस्टर डोज लगवाना जरूरी है, ताकि उनमें कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बनी रहे।
कोट
जिले में टीकाकरण तेजी से कराया जा रहा है। केंद्रों पर तैनात कर्मियों के अलावा आशा कार्यकर्ता भी क्षेत्र भ्रमण के दौरान कोरोनारोधी टीका लगवाने के प्रति जागरूक करते हैं। बूस्टर डोज भी समय से लगवाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। जल्दी ही इसका भी ग्राफ बढ़ जाएगा।
-डॉ. आईए अंसारी, उप मुख्य चिकित्साधिकारी