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Maharajganj News: विकास कार्यों में लापरवाही पर तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही

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डीएम ने दिए सैम-मैम बच्चों को चिह्नित करने के निर्देश
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महराजगंज। जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल की अध्यक्षता में बुधवार को विकास भवन सभागार में विकास कार्यों एवं विभिन्न विभागों की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक हुई।
बैठक में विभागवार योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं को निर्धारित समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और लक्ष्य प्राप्ति में लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय होगी।
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वीबी-जी-राम योजना की समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने गत वित्तीय वर्ष की तुलना में अधिक मानव दिवस सृजित करने के निर्देश दिए। कन्वर्जेंस के तहत स्वीकृत कार्यों के प्राक्कलन तत्काल तैयार कर निर्माण कार्य शुरू कराने तथा अधिनियम के तहत एक सप्ताह के भीतर शत-प्रतिशत ग्राम पंचायतों में कार्य शुरू कराने को कहा। सार्वजनिक परिसंपत्तियों के अनुरक्षण, प्रमुख मार्गों व जल निकासी व्यवस्था की मरम्मत, कुलावों की सफाई और चक मार्गों पर मिट्टी भरान को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। एरिया ऑफिसर ऐप पर निरीक्षण भी निर्धारित लक्ष्य के अनुसार पूरा कराने को कहा।
पंचायती राज विभाग की समीक्षा में बीडीओ और सहायक विकास अधिकारी पंचायत को तहसीलों से समन्वय कर तालाबों के पट्टों की 75 प्रतिशत राशि ओएसआर खातों में जमा कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही आरआरसी के प्रभावी संचालन और सामुदायिक शौचालयों को समूहों के माध्यम से बेहतर ढंग से संचालित कराने पर जोर दिया गया।
जल जीवन मिशन की समीक्षा में अधूरी पेयजल परियोजनाओं को शीघ्र पूरा कराने तथा परियोजना पूर्ण होने के बाद बीडीओ द्वारा मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करने के निर्देश दिए गए। पाइपलाइन बिछाने से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत भी प्राथमिकता से कराने को कहा गया।
पंचायत सहायकों की उपस्थिति में सुधार पर जिलाधिकारी ने प्रसन्नता जताई। डीपीआरओ ने बताया कि औसत उपस्थिति 75 प्रतिशत पहुंच गई है और जनपद प्रदेश में आठवें स्थान पर है, जबकि पिछले माह 46वें स्थान पर था।
बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की समीक्षा में एनआरसी में बेड के सापेक्ष बच्चों की कम संख्या पर जिलाधिकारी ने असंतोष जताया। उन्होंने सैम-मैम बच्चों को चिह्नित कर आवश्यकता के अनुसार एनआरसी में भर्ती कराने, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना का प्रचार-प्रसार बढ़ाने और प्रत्येक गांव में वीएचएसएनडी सत्र प्रभावी ढंग से आयोजित कराने के निर्देश दिए। प्रोजेक्ट पहचान के तहत विकासात्मक विलंब एवं अस्थायी दिव्यांगता वाले बच्चों की पहचान कर समय से उपचार और पुनर्वास सुविधा उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया।
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बैठक में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार ,जिला विकास अधिकारी, परियोजना निदेशक डीआरडीए, उपायुक्त श्रम रोजगार, उपायुक्त स्वरोजगार, डीपीआरओ, जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला सूचना अधिकारी प्रभाकर मणि त्रिपाठी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
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